इसरो का निजीकरण नहीं, भूमिका भी नहीं होगी कम; निजी क्षेत्र को मिलेगी बड़ी भूमिका

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नई दिल्ली, 7 सितंबर, वाय के न्यूज। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने निजीकरण और भूमिका कम किए जाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों को खारिज कर दिया है। इसरो ने स्पष्ट किया है कि न तो उसका निजीकरण किया जाएगा और न ही भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी अहमियत कम होगी।

इसरो का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब संगठन के नौ कर्मचारी संगठनों ने 4 सितंबर को इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन को पत्र लिखकर अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की दिशा और इसके भविष्य के प्रभाव पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। कर्मचारी संगठनों की चिंता खास तौर पर रॉकेट और उपग्रह निर्माण तथा संचालन की कुछ गतिविधियों के निजी क्षेत्र या सार्वजनिक उपक्रमों को हस्तांतरित किए जाने को लेकर है।

कहां से शुरू हुआ विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि में IN-SPACe के अध्यक्ष पवन गोयनका का 21 अगस्त का बयान भी है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा था कि भविष्य में इसरो खुद प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा और यह काम निजी क्षेत्र या सार्वजनिक उपक्रम करेंगे। कर्मचारी संगठनों ने इस बयान के बाद सवाल उठाया कि क्या यह सरकार की स्वीकृत नीति है और यदि है तो इसरो की भविष्य की जिम्मेदारियां क्या होंगी।

कर्मचारी संगठनों ने PSLV, LVM3 और SSLV जैसे प्रक्षेपण यानों के डिजाइन, विकास, निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और प्रक्षेपण में इसरो की भविष्य की भूमिका पर भी स्पष्टता मांगी। उनका तर्क है कि ये गतिविधियां केवल निर्माण का काम नहीं, बल्कि इसरो की संस्थागत विशेषज्ञता और रणनीतिक क्षमता का हिस्सा हैं।

2020 से खुल रहा है निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र

भारत ने वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में बड़ा सुधार शुरू किया था। इसके बाद IN-SPACe को गैर-सरकारी अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, अधिकृत करने और निगरानी की व्यवस्था के रूप में स्थापित किया गया। वर्ष 2023 की भारतीय अंतरिक्ष नीति ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की पूरी वैल्यू चेन तक विस्तार देने की नीति को औपचारिक रूप दिया।

इस नीति के तहत स्टार्टअप, निजी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को उपग्रह, प्रक्षेपण सेवाओं, अंतरिक्ष आधारित सेवाओं और अन्य गतिविधियों में भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है। उद्देश्य भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार और उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

इसरो ने बताया अपना ‘अगला अध्याय’

इसरो ने अब स्पष्ट किया है कि इन सुधारों को निजीकरण नहीं, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए। संगठन के मुताबिक परिपक्व और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का उत्पादन और व्यावसायीकरण उद्योग तेजी से कर सकता है। इससे इसरो के वैज्ञानिक और तकनीकी मानव संसाधन को अधिक उन्नत अनुसंधान और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर लगाया जा सकेगा।

इसरो के मुताबिक वह उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान, नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों, गहरे अंतरिक्ष और ग्रहों की खोज तथा रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमताओं से जुड़े मिशनों में केंद्रीय भूमिका निभाता रहेगा।

वहीं परिपक्व प्रक्षेपण यानों, नियमित उपग्रहों और अन्य स्थापित प्रणालियों का उत्पादन भविष्य में निजी उद्योग या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम प्रतिस्पर्धी प्रक्रियाओं के जरिए कर सकते हैं। इसरो का कहना है कि इससे भारत की अंतरिक्ष गतिविधियों का पैमाना बढ़ेगा और संगठन भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों पर ज्यादा ध्यान दे सकेगा।

इसरो ने अपने संदेश में साफ किया है कि बदलाव इसरो के महत्व में नहीं, बल्कि भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के पैमाने और संरचना में हो रहा है।

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