नई दिल्ली, 5 सितंबर, वाय के न्यूज। दूरदराज और डिजिटल सुविधाओं से वंचित इलाकों के लोगों को अब अदालत की सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मोबाइल ई-सेवा वैन को रवाना कर ई-कोर्ट सेवाओं, कानूनी सहायता और विवाद समाधान सुविधाओं को नागरिकों के दरवाजे तक पहुंचाने की पहल शुरू की है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 4 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर से इन वैन को हरी झंडी दिखाई। ये वैन गांवों, आदिवासी क्षेत्रों और अन्य दूरदराज इलाकों में जाकर न्यायिक सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। यह पहल ई-कोर्ट परियोजना का विस्तार है और इसका उद्देश्य न्याय तक पहुंच में मौजूद भौगोलिक और डिजिटल दूरी को कम करना है।
73 वैन का होगा नेटवर्क
26 वैन इस परियोजना का पहला चरण हैं। देश के चिन्हित हाईकोर्ट और जिला अदालतों के अधिकार क्षेत्र में कुल 73 मोबाइल ई-सेवा वैन चरणबद्ध तरीके से तैनात की जाएंगी।
केस की जानकारी से ई-फाइलिंग तक
मोबाइल वैन में केस की स्थिति, अगली सुनवाई की तारीख, आदेश और फैसलों की जानकारी लेने के साथ डिजिटल ई-फाइलिंग और सुरक्षित ई-पेमेंट की सुविधा मिलेगी। मोबाइल लोक अदालत और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
वैन में हाई-स्पीड 4जी/5जी कनेक्टिविटी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा है। इसके जरिए जरूरत के मुताबिक दूरदराज क्षेत्रों से रिमोट सुनवाई, मध्यस्थता और गवाहों के बयान दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
चालान और छोटे विवादों के निपटारे की सुविधा
मोबाइल लोक अदालतों और विशेष अभियानों के जरिए मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े चालान, प्री-लिटिगेशन विवाद तथा कुछ उपयोगिता और बिजली संबंधी विवादों के निपटारे की सुविधा भी दी जाएगी। क्षेत्रीय भाषाओं में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यह पहल न्याय व्यवस्था को अदालत परिसरों से बाहर गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक ले जाने तथा नागरिकों के लिए न्यायिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
