आईआईटी पटना की नई तकनीक से स्मार्ट मशीनें होंगी और बेहतर

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हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर विकसित, रक्षा से लेकर चिकित्सा तक कई क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली, 3 अगस्त (पीआईबी)/वाय के न्यूज। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पटना के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा हाइब्रिड मैग्नेटो-रियोमीटर विकसित किया है, जिससे भविष्य की स्मार्ट मशीनों और उपकरणों को और अधिक कुशल बनाया जा सकेगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से विकसित यह तकनीक रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा और औद्योगिक स्वचालन जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है।

यह उपकरण मैग्नेटोरियोलॉजिकल (एमआर) द्रव यानी ऐसे “स्मार्ट तरल पदार्थों” का परीक्षण करता है, जिनकी विशेषता यह है कि चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आते ही वे तेजी से गाढ़े होकर लगभग ठोस जैसी अवस्था में आ जाते हैं। इसी गुण के कारण इनका उपयोग आधुनिक ब्रेक सिस्टम, शॉक एब्जॉर्बर, कंपन नियंत्रक, क्लच, रोबोटिक्स और कई चिकित्सा उपकरणों में किया जाता है।

आईआईटी पटना के प्रोफेसर चिरंजीत सरकार के नेतृत्व में विकसित इस नए उपकरण की खासियत यह है कि यह वास्तविक परिस्थितियों में इन स्मार्ट द्रवों के व्यवहार का पहले की तुलना में अधिक सटीक अध्ययन कर सकता है। इससे वैज्ञानिकों और उद्योगों को बेहतर गुणवत्ता वाले एमआर द्रव विकसित करने में मदद मिलेगी।

शोधकर्ताओं ने नैनो आयरन पाउडर आधारित एमआर द्रव भी तैयार किए हैं और उनका परीक्षण इस नए उपकरण से किया है। परीक्षण में पाया गया कि यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक विश्वसनीय और विस्तृत जानकारी देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का लाभ केवल स्मार्ट मशीनों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उपयोग पॉलिमर, दवा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, सौंदर्य प्रसाधन और पेट्रोकेमिकल उद्योग में नई सामग्री विकसित करने और उनकी गुणवत्ता जांचने में भी किया जा सकेगा।

यह शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका Rheologica Acta में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नवाचार भविष्य में ऊर्जा-कुशल, अधिक सुरक्षित और बुद्धिमान तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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