अब हर खेत का डिजिटल हिसाब, फसल से रकबे तक दर्ज हो रहा डेटा

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डिजिटल क्रॉप सर्वे में सारंगढ़-बिलाईगढ़ प्रदेश में अव्वल, 53,524 में से 47,350 प्लॉटों का सर्वे पूरा

सारंगढ़, 7 सितंबर, वाय के न्यूज। खेत में कौन-सी फसल बोई गई है, कितने रकबे में बोई गई है और मौके पर फसल की वास्तविक स्थिति क्या है—इन जानकारियों को अब डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जा रहा है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के जरिए भूमि रिकॉर्ड में दर्ज प्लॉट को मौके पर मौजूद फसल से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य फसल संबंधी आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित, अद्यतन और उपयोगी बनाना है। इस काम में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रदेश में सबसे आगे है। प्रदेश स्तरीय रिपोर्ट में जिले ने 87 प्रतिशत प्रगति के साथ पहला स्थान हासिल किया है।

जिले में 6 सितंबर शाम 4.30 बजे तक 53,524 चिन्हांकित प्लॉटों में से 47,350 का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा किया जा चुका था। विस्तृत जिला रिपोर्ट के अनुसार सर्वे की प्रगति 88.45 प्रतिशत है, जबकि इनमें से 35,476 प्लॉटों का अनुमोदन भी हो चुका है।

कैसे होता है डिजिटल क्रॉप सर्वे?

डिजिटल क्रॉप सर्वे में सर्वेक्षणकर्ता मौके पर खेत तक पहुंचकर मोबाइल आधारित एप के माध्यम से प्लॉट और उसमें बोई गई फसल की जानकारी दर्ज करता है। खेत की पहचान संबंधित भूमि रिकॉर्ड से मिलान की जाती है और मौके पर दिखाई दे रही फसल का विवरण डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी का सत्यापन और अनुमोदन किया जाता है।

इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जमीन के स्वामित्व या क्षेत्रफल के रिकॉर्ड के साथ उस पर वास्तव में कौन-सी फसल उगाई जा रही है, उसका भी डिजिटल डेटा तैयार हो रहा है।

पहले क्या होता था?

परंपरागत व्यवस्था में फसल संबंधी जानकारी मुख्य रूप से मैदानी निरीक्षण और मैन्युअल रिकॉर्ड के जरिए जुटाई जाती थी। जानकारी को कागज या स्थानीय स्तर के रिकॉर्ड में दर्ज करने के बाद उसका संकलन और उच्च स्तर पर भेजने की प्रक्रिया होती थी।

ऐसी व्यवस्था में मैदानी स्थिति बदलने और रिकॉर्ड अपडेट होने के बीच समय का अंतर रह सकता था। फसल बदल जाने, खेत खाली रहने या अलग मौसम में अलग फसल बोए जाने जैसी स्थितियों को रिकॉर्ड में समय पर अपडेट करना भी चुनौतीपूर्ण था। बड़े क्षेत्र में आंकड़े जुटाने के दौरान मानवीय त्रुटि की संभावना भी बनी रहती थी।

किन विसंगतियों को कम करने की कोशिश?

डिजिटल सर्वे का मकसद केवल कागजी रिकॉर्ड को मोबाइल पर दर्ज करना नहीं है। इसके जरिए मौके की वास्तविक फसल स्थिति और उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्रणाली में जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

इससे फसल बदलने या खेत की स्थिति में बदलाव होने पर रिकॉर्ड को अधिक तेजी से अपडेट करने, सर्वे की प्रगति पर नजर रखने और अलग-अलग स्तरों पर आंकड़ों के संकलन में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि डिजिटल रिकॉर्ड भी तभी विश्वसनीय होगा, जब मौके पर सर्वे, सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया सही ढंग से हो।

कृषि योजना में काम आएगा डेटा

हर खेत की फसल और रकबे की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होने से किसी गांव, तहसील या जिले में अलग-अलग फसलों का वास्तविक क्षेत्रफल जानना आसान होगा। यह आंकड़ा फसल उत्पादन के अनुमान, बीज और कृषि आदानों की जरूरत तथा कृषि योजनाओं की बेहतर योजना बनाने में उपयोगी हो सकता है।

प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भी खेतवार फसल संबंधी डिजिटल आंकड़े नुकसान के आकलन के लिए उपयोगी आधार बन सकते हैं। फसल बीमा या अन्य योजनाओं में इस डेटा का इस्तेमाल संबंधित विभाग के नियमों के अनुसार किया जा सकेगा।

सरसींवा और भटगांव में 93 प्रतिशत से ज्यादा सर्वे

जिले के सरसींवा और भटगांव तहसील में डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम 93 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। सरसींवा में 8,187 में से 7,653 प्लॉट यानी 93.27 प्रतिशत और भटगांव में 6,235 में से 5,847 प्लॉट यानी 93.15 प्रतिशत का सर्वे पूरा हुआ है।

सारंगढ़ तहसील में 16,134 में से 14,032 प्लॉट का सर्वे पूरा हुआ है, जो 88.60 प्रतिशत है। सरैया में 86.64 प्रतिशत, बिलाईगढ़ में 85.49 प्रतिशत और बरमकेला में 84.49 प्रतिशत प्लॉटों का सर्वे पूरा किया जा चुका है।

प्रदेश में पहले तीन स्थान पर

प्रदेश स्तरीय रिपोर्ट में सारंगढ़-बिलाईगढ़ 87 प्रतिशत प्रगति के साथ पहले स्थान पर है। खैरागढ़ जिला 86 प्रतिशत के साथ दूसरे और कोरिया 81 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है।

जिले में अभी 6,174 प्लॉटों का सर्वे बाकी है। कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने एसडीएम और तहसीलदारों को शेष प्लॉटों का सर्वे तेजी से पूरा कराने और लंबित प्रकरणों के अनुमोदन में गति लाने के निर्देश दिए हैं।

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