रायपुर, 20 अगस्त। वाय के न्यूज।इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष के ‘पेस्ट मैनेजमेंट इन क्रॉप्स एंड स्टोर्ड ग्रेन्स-1’ (एईएनटी-221) विषय की परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक होने संबंधी शिकायत के बाद निरस्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है और उसे एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
कवर्धा से मिली शिकायत
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रश्नपत्र से संबंधित शिकायत कवर्धा से प्राप्त हुई थी। परीक्षा नियंत्रक को सुबह इस संबंध में एक ई-मेल मिला था। कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक के हवाले से प्रकाशित खबरों के अनुसार ई-मेल भेजने वाला व्यक्ति छात्र नहीं, बल्कि बाहरी व्यक्ति था। शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने मामले की जांच शुरू की।
विश्वविद्यालय ने अभी पेपर लीक नहीं माना
मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि नहीं की है। कुलसचिव के अनुसार प्रारंभिक जांच में कथित रूप से प्रसारित सामग्री वास्तविक प्रश्नपत्र से अलग पाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि वायरल सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार की गई प्रतीत होती है। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद होगी।
परीक्षा में सभी विद्यार्थी शामिल हुए
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार परीक्षा सुबह 10 बजे निर्धारित थी और परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई तथा सभी विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। कुलसचिव ने बताया कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा शुरू होने से करीब आधा घंटा पहले खोला जाता है।
इसके बावजूद प्रश्नपत्र की गोपनीयता को लेकर मिली शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय ने संबंधित परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया है।
पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच
विश्वविद्यालय ने मामले की पड़ताल के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति प्रश्नपत्र तैयार होने और उसके संबद्ध महाविद्यालयों तक पहुंचने की प्रक्रिया की जांच करेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार प्रश्नपत्र रायपुर में तैयार होकर संबद्ध महाविद्यालयों को भेजे जाते हैं।
समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देनी है।
एबीवीपी ने की थी परीक्षा रद्द करने की मांग
प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपकर संबंधित परीक्षा रद्द करने, उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पुलिस जांच भी होगी
कुलसचिव ने कहा है कि मामले को पुलिस को जांच के लिए सौंपा जाएगा। फिलहाल पुलिस में प्राथमिकी दर्ज होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। विश्वविद्यालय की जांच समिति और आगे होने वाली पुलिस जांच से यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा प्रश्नपत्र की गोपनीयता वास्तव में भंग हुई थी या सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री फर्जी थी।
