अंतरिक्ष में बढ़ा टक्कर का खतरा, इसरो ने डेढ़ साल में 29 बार बदली उपग्रहों की कक्षा

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नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे (स्पेस डेब्रिस) के कारण भारतीय उपग्रहों पर टक्कर का खतरा लगातार बढ़ रहा है। सरकार ने संसद में बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस खतरे से बचाने के लिए 2025 में 20 और 2026 में अब तक 9 यानी कुल 29 Collision Avoidance Manoeuvres (CAM) किए हैं। इन अभियानों में संभावित टक्कर से बचाने के लिए उपग्रहों की कक्षा बदली जाती है।

सरकार के अनुसार, भारत के 22 सक्रिय उपग्रहों में से 20 निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में हैं। यह क्षेत्र पृथ्वी से 2,000 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर स्थित है, जहां अंतरिक्ष मलबे और निष्क्रिय उपग्रहों की संख्या सबसे अधिक होने से टक्कर का जोखिम भी ज्यादा रहता है।

अंतरिक्ष मलबे की निगरानी के लिए श्रीहरिकोटा में स्थापित मल्टी-ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग रडार (MOTR) लगातार अंतरिक्ष वस्तुओं पर नजर रख रहा है। इसके अलावा लद्दाख के हानले में एक अत्याधुनिक ऑप्टिकल टेलीस्कोप अंतिम चरण में है, जो भू-स्थिर कक्षा (GEO) में 30 सेंटीमीटर या उससे बड़ी वस्तुओं का भी पता लगा सकेगा।

सरकार ने यह भी बताया कि अंतरिक्ष गतिविधियों से तीसरे पक्ष को होने वाले संभावित नुकसान और बीमा से जुड़ा नीति ढांचा तैयार किया गया है, जिस पर फिलहाल विचार चल रहा है।

भारत अंतरिक्ष मलबे को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2024 में देश ने ‘डेब्रिस-फ्री स्पेस मिशन’ पहल की घोषणा की थी। इसका लक्ष्य भविष्य में सरकारी और निजी क्षेत्र सहित सभी भारतीय अंतरिक्ष अभियानों को ‘शून्य अंतरिक्ष मलबा’ की दिशा में ले जाना है।

संसद में यह जानकारी केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने एक लिखित उत्तर में दी।

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