नई दिल्ली, 18 अगस्त। वाय के न्यूज। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यूजीसी-नेट के तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में गंभीर गलतियां सामने आने के बाद अब सरकार ने NTA की पूरी परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अधिकारियों को परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को नई दिल्ली में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, NTA के महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में जोशी ने परीक्षा के तय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा। मंत्रालय के अनुसार, NTA से 50 से ज्यादा कर्मचारियों को हटाया जा चुका है।
तीन विषयों की परीक्षा फिर होगी
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब NTA को यूजीसी-नेट जून 2026 के अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र दोबारा कराने पड़े हैं।
NTA की जांच समिति ने इन तीनों प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद और व्याकरण संबंधी कई गलतियां पाईं। कुछ प्रमुख विद्वानों के नाम गलत लिखे गए, पुस्तकों के नाम बिगड़े हुए थे और कई सवालों में पहले पूछे जा चुके प्रश्न दोहराए गए थे। समिति ने निष्पक्ष परीक्षा के लिए तीनों विषयों की दोबारा परीक्षा कराने की सिफारिश की।
अब अंग्रेजी और वाणिज्य की परीक्षा 9 सितंबर, जबकि समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को होगी। इसके लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा।
NTA में आएंगे नए विशेषज्ञ
सरकार अब NTA की कार्यप्रणाली में विशेषज्ञों को शामिल करने की तैयारी में है। 10 नए पेशेवर पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं। इनमें मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, मुख्य वित्त अधिकारी, मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी, परीक्षा सुरक्षा से जुड़े अधिकारी तथा अनुसंधान एवं साइकोमेट्रिक्स से जुड़े पद शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा, प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा सुरक्षा और विद्यार्थियों की परीक्षा संबंधी क्षमताओं के आकलन यानी साइकोमेट्रिक्स जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा।
प्रश्नपत्र की सुरक्षा पर खास जोर
शिक्षा मंत्री ने प्रश्नपत्रों और अन्य गोपनीय सामग्री की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सुरक्षित कमरों, इंटरनेट से पूरी तरह अलग रखे गए एयर-गैप्ड कंप्यूटर सिस्टम और परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा कराने की व्यवस्था की समीक्षा होगी।
NTA को अपनी सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का व्यापक ऑडिट कराने और उसमें सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
बार-बार विवादों से विश्वसनीयता पर सवाल
NTA की जिम्मेदारी देश की कई महत्वपूर्ण प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं कराने की है। ऐसे में प्रश्नपत्र में गलती के कारण परीक्षा दोबारा कराने की नौबत आने से अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त समय और मानसिक दबाव पड़ता है।
ताजा मामले में सरकार का जोर अब केवल गलती सुधारने पर नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा कराने तक पूरी व्यवस्था को बदलने पर है। इससे NTA की परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और भरोसा बहाल करने की चुनौती सामने है।
