42 बंद कोयला खदानों में पर्यावरण की पुनर्बहाली पर रिपोर्ट जारी

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जर्मनी के साथ तकनीकी सहयोग समझौता, अगले दो-तीन वर्षों में 147 और खानों के वैज्ञानिक बंदीकरण का लक्ष्य

नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026 । कोयला मंत्रालय ने वैज्ञानिक तरीके से बंद की गई कोयला खानों पर देश की पहली वार्षिक रिपोर्ट ‘आरोह’ जारी की है। रिपोर्ट में 42 ऐसी कोयला खानों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जहां खनन समाप्त होने के बाद वैज्ञानिक बंदीकरण, पर्यावरणीय पुनर्बहाली और भूमि के पुनः उपयोग का कार्य किया गया।

नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने रिपोर्ट का विमोचन किया। मंत्रालय के अनुसार, ‘आरोह’ भारत में वैज्ञानिक खान बंदीकरण और खनन के बाद भूमि के सतत उपयोग पर तैयार पहला व्यापक दस्तावेज है। इसमें प्रत्येक खान की बंदीकरण प्रक्रिया, पुनः उपयोग, पहले और बाद की स्थिति तथा संबंधित जानकारी को शामिल किया गया है।

कोयला मंत्री ने बताया कि देश में अब तक 42 कोयला खानों का वैज्ञानिक बंदीकरण किया जा चुका है। इनमें 33 खानों का बंदीकरण पिछले एक वर्ष में हुआ है। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में 147 और खानों का वैज्ञानिक तरीके से बंदीकरण करने का लक्ष्य रखा गया है।

रिपोर्ट में वेस्ट बोकारो, विश्रामपुर और विवेकनगर सोलर परियोजना जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से यह दिखाया गया है कि बंद खदानों की भूमि का उपयोग सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, पर्यावरणीय पुनर्बहाली, सामुदायिक विकास और अन्य सतत गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर कोयला मंत्रालय और जर्मनी की विकास एजेंसी जीआईजेड (GIZ) के बीच वैज्ञानिक खान बंदीकरण और बंद खदानों के पुनः उपयोग में तकनीकी सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना वर्ष 2030 तक चलेगी और इसके लिए 10 मिलियन यूरो का सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। समझौते का उद्देश्य भारत में वैज्ञानिक खान बंदीकरण, क्षमता निर्माण और वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों को बढ़ावा देना है।

समारोह में कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनियों द्वारा स्थापित ‘कोल नीर’ जल शोधन संयंत्रों का भी उद्घाटन किया गया। इन संयंत्रों के माध्यम से खदानों से निकलने वाले पानी को शुद्ध कर सुरक्षित पेयजल के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके अलावा, झारखंड के झरिया कोयला क्षेत्र में पुनर्वास, कौशल विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (जेआरडीए) ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड तथा राजधानी यूनिवर्सल फैब्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इनके तहत उद्योग से जुड़े कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।

कोयला मंत्रालय का कहना है कि वैज्ञानिक खान बंदीकरण का उद्देश्य केवल खनन गतिविधि समाप्त करना नहीं, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों को पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित बनाकर उन्हें भविष्य में उपयोगी परिसंपत्तियों में बदलना है।

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