गांवों तक पहुंचेगी डिजिटल डायबिटीज निगरानी, ग्रामीण भारत में मधुमेह पर बढ़ा फोकस

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नई दिल्ली, 16 अगस्त। वाय के न्यूज। ग्रामीण भारत में बढ़ती मधुमेह की समस्या से निपटने के लिए अब जागरूकता, जांच और मरीजों के नियमित फॉलो-अप को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की पहल शुरू हुई है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मधुमेह की रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की जरूरत बताते हुए आरएसएसडीआई ग्रामीण आउटरीच डिजिटल पोर्टल और ‘विश्वास’ (VISHWAS) डायबिटीज जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी का शुभारंभ किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ग्रामीण भारत अब मधुमेह की समस्या से अछूता नहीं है। समय पर बीमारी की पहचान, उपचार, जीवनशैली में बदलाव और नियमित फॉलो-अप से मधुमेह के बढ़ते बोझ और उसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

गांवों में मरीजों की जानकारी और फॉलो-अप का डिजिटल रिकॉर्ड

नए डिजिटल पोर्टल पर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यक्रम से जुड़े लोगों का पंजीकरण, उपचार का दस्तावेजीकरण और नियमित फॉलो-अप दर्ज किया जा सकेगा। कार्यक्रम की निगरानी के साथ बिना पहचान वाली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी तैयार होगी, जिसका इस्तेमाल जनस्वास्थ्य योजना और शोध में किया जा सकेगा।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह के मरीजों की देखभाल को केवल एक बार की जांच तक सीमित रखने के बजाय लगातार निगरानी से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

करीब 30 गांवों तक पहुंच चुका कार्यक्रम

आरएसएसडीआई का ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम कई राज्यों के करीब 30 गांवों तक पहुंच चुका है। इसके तहत आरएसएसडीआई के सदस्य गांवों को अपनाकर मधुमेह के प्रति जागरूकता, शुरुआती जांच, उपचार और फॉलो-अप की व्यवस्था को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। कार्यक्रम को आने वाले वर्षों में और विस्तार देने की योजना है।

स्थानीय भाषाओं में डिजिटल स्वास्थ्य पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को भारत की भाषाई विविधता के अनुरूप बनाना जरूरी है। उन्होंने स्थानीय भाषाओं और बोलियों को ऐसे डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म में शामिल करने पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग स्वास्थ्य संबंधी जानकारी आसानी से समझ सकें।

उन्होंने कहा कि विज्ञान, डिजिटल नवाचार और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देश के हर गांव और नागरिक तक पहुंचना चाहिए।

युवाओं के स्वास्थ्य को बताया अहम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है। इसलिए युवाओं को मधुमेह और अन्य गैर-संचारी बीमारियों से बचाना देश के जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने मधुमेह की रोकथाम को केवल चिकित्सकों की जिम्मेदारी मानने के बजाय लोगों, समुदायों, स्वास्थ्यकर्मियों और संस्थानों की साझा जिम्मेदारी बताया।

कई क्षेत्रों को जोड़कर काम करने की जरूरत

केंद्रीय मंत्री ने मधुमेह और अन्य गैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, तकनीकी संस्थाओं, निजी संगठनों और स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीक के बीच सहयोग से डिजिटल स्वास्थ्य और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकता है।

आरएसएसडीआई की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण भारत में मधुमेह की जागरूकता, शुरुआती पहचान, उपचार और लगातार निगरानी को एक साथ जोड़कर ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसे आगे बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।

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