नई दिल्ली, 28 अगस्त। वाय के न्यूज। भारत ने 2047 तक परमाणु ऊर्जा की स्थापित क्षमता बढ़ाकर 100 गीगावॉट करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में देश में सात साइटों पर 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर संचालित हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 गीगावॉट है। नौ अन्य रिएक्टर निर्माणाधीन हैं, जबकि 10 और इकाइयों की तैयारी चल रही है। यह जानकारी पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के परमाणु ऊर्जा पर जारी Backgrounder में दी गई है।
सरकार के अनुसार परमाणु ऊर्जा को देश की ऊर्जा सुरक्षा और कम कार्बन वाली बिजली के प्रमुख स्रोत के रूप में विस्तार दिया जा रहा है। केंद्रीय बजट 2025-26 में स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने परमाणु ऊर्जा के विस्तार के लिए शांति अधिनियम, 2025 को भी महत्वपूर्ण कदम बताया है।

बिजली के अलावा स्वास्थ्य और कृषि में इस्तेमाल
पीआईबी के अनुसार परमाणु तकनीक का उपयोग बिजली उत्पादन के अलावा स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य संरक्षण, खनन, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, सेमीकंडक्टर और हाइड्रोजन उत्पादन में किया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा विभाग से जुड़े संस्थान रेडियोफार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा इमेजिंग और कैंसर उपचार से जुड़ी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। सरकार के अनुसार 2024-25 में टाटा मेमोरियल सेंटर ने 1.3 लाख मरीजों का पंजीकरण किया और करीब पांच लाख महिलाओं की मुंह, स्तन तथा गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच की।
कृषि क्षेत्र में विकिरण-प्रेरित उत्परिवर्तन और क्रॉस-ब्रीडिंग के जरिए फसल की नई किस्में विकसित की जा रही हैं। पीआईबी के मुताबिक भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने 70 फसलों की किस्में विकसित की हैं।
खाद्य संरक्षण में भी विकिरण तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के अनुसार 2025 में खाद्य विकिरण बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 17 समझौता ज्ञापन किए गए और छह नई गामा विकिरण प्रसंस्करण सुविधाएं चालू हुईं। इससे देश में ऐसी परिचालन सुविधाओं की संख्या 40 हो गई है।

सेमीकंडक्टर से हाइड्रोजन तक तकनीक का विस्तार
पीआईबी के अनुसार तालचेर में सेमीकंडक्टर अनुप्रयोगों के लिए 99.8 प्रतिशत शुद्धता वाले बोरॉन-11 की इलेक्ट्रॉनिक्स-ग्रेड संवर्धन सुविधा स्थापित की गई है। सरकार का कहना है कि इससे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों के क्षेत्र में आयात निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।
परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भी किया जा रहा है। Backgrounder में कहा गया है कि 2026 में कलपक्कम में परमाणु प्रक्रिया ऊष्मा का उपयोग करने वाली हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा का उद्घाटन किया गया।
परमाणु संयंत्रों में बहुस्तरीय सुरक्षा का दावा
सरकार ने परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को कार्यक्रम की आधारशिला बताया है। पीआईबी के अनुसार भारतीय परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में ‘डिफेंस इन डेप्थ’ डिजाइन अपनाया जाता है। इसमें कई भौतिक अवरोध, बैकअप सुरक्षा प्रणालियां, लगातार निगरानी और आपातकालीन रिएक्टर शटडाउन तथा कोर कूलिंग की व्यवस्था शामिल है।
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के मानकों के तहत संयंत्रों में विकिरण स्तर, कर्मचारियों के संपर्क और पर्यावरण की निगरानी की जाती है। पीआईबी के अनुसार आम जनता के लिए वार्षिक विकिरण खुराक सीमा एक मिलीसीवर्ट है।

16 किलोमीटर का आपातकालीन योजना क्षेत्र
परमाणु आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय से लेकर संयंत्र स्तर तक बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। प्रत्येक परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए नियामकीय मंजूरी वाली ऑन-साइट और ऑफ-साइट आपातकालीन योजनाएं लागू हैं।
पीआईबी के अनुसार संयंत्र, जिला प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नियमित मॉक ड्रिल और आपातकालीन अभ्यास करते हैं। परमाणु संयंत्रों के आसपास 16 किलोमीटर का आपातकालीन योजना क्षेत्र निर्धारित है। हवा, पानी, मिट्टी, वनस्पति और खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए पर्यावरण सर्वेक्षण प्रयोगशालाएं भी संचालित हैं।
रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन पर जोर
सरकार ने रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था का दावा किया है। तरल रेडियोधर्मी कचरे को निर्धारित मानकों के अनुसार उपचारित करने और उसकी रेडियोधर्मिता सुरक्षित स्तर तक कम करने के बाद ही निर्वहन की अनुमति होती है। ठोस कचरे को संसाधित कर विशेष रूप से तैयार ऑन-साइट सुविधाओं में रखा जाता है।
पीआईबी के अनुसार भारत के पास उच्च स्तरीय रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन के लिए स्वदेशी विट्रीफिकेशन तकनीक भी है। इसमें उच्च स्तरीय रेडियोधर्मी कचरे को स्थिर ग्लास ब्लॉक में बदला जाता है।
फुकुशिमा के बाद सभी संयंत्रों की सुरक्षा समीक्षा
Backgrounder में कहा गया है कि 2011 की फुकुशिमा दुर्घटना के बाद भारत के प्रत्येक परमाणु ऊर्जा संयंत्र की व्यापक सुरक्षा समीक्षा की गई। सरकार के अनुसार समीक्षा के बाद सुझाए गए सभी अल्पकालिक और मध्यम अवधि के सुरक्षा सुधार पूरे किए जा चुके हैं, जबकि दीर्घकालिक सुरक्षा उन्नयन वर्तमान और भविष्य के रिएक्टरों में जारी हैं।
सरकार का कहना है कि परमाणु ऊर्जा को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य और 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
