12 वर्षों में संविधान में हुए 8 संशोधन

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Glimpses of the new Parliament Building, in New Delhi

सरकार ने संसद में दी जानकारी

नई दिल्ली, 25 जुलाई, 2026, वाय के न्यूज। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया है कि पिछले 12 वर्षों के दौरान भारतीय संविधान में आठ संशोधन किए गए हैं। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक लिखित उत्तर में इन संशोधनों का विवरण प्रस्तुत किया।

सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 से 2023 के बीच संविधान के 99वें से 106वें संशोधन तक कुल आठ संशोधन अधिनियमित किए गए। इनमें न्यायाधीशों की नियुक्ति व्यवस्था, भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता, जीएसटी, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 प्रतिशत आरक्षण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए राजनीतिक आरक्षण की अवधि बढ़ाना, राज्यों की ओबीसी सूची से जुड़े प्रावधान तथा महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

प्रमुख संविधान संशोधन

  • 99वां संशोधन (2014): न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) का प्रावधान। (बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे निरस्त कर कॉलेजियम व्यवस्था बहाल कर दी।)
  • 100वां संशोधन (2015): भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते को लागू करने का प्रावधान।
  • 101वां संशोधन (2016): देशभर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू करने का संवैधानिक आधार।
  • 102वां संशोधन (2018): राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा।
  • 103वां संशोधन (2019): आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण।
  • 104वां संशोधन (2019): लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी-एसटी के लिए आरक्षित सीटों की अवधि 25 जनवरी 2030 तक बढ़ाई गई।
  • 105वां संशोधन (2021): राज्यों को अपनी ओबीसी सूची तैयार करने और बनाए रखने की शक्ति स्पष्ट की गई।
  • 106वां संशोधन (2023): लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह जानकारी लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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