यूजीसी ने 21 पुराने पाठ्यक्रमों में भी बदलाव किया; 2026-27 सत्र से नए मानकों के अनुसार पढ़ाई
नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026। फिजियोथेरेपी, ऑप्टोमेट्री, मेडिकल लैब, रेडियोलॉजी, डायलिसिस और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई के नए विकल्प बढ़ गए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) के तहत 33 नई यूजी-पीजी डिग्रियों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही 21 मौजूदा डिग्री पाठ्यक्रमों को भी नए सिरे से तैयार किया गया है।
इन बदलावों का असर 2026-27 शैक्षणिक सत्र से दिखाई देगा। राज्यों और विश्वविद्यालयों को नए पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कौन-कौन से क्षेत्र शामिल
नई और संशोधित डिग्रियों में फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, ऑप्टोमेट्री, मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, न्यूट्रिशन एवं डायटेटिक्स, मनोविज्ञान, मेडिकल रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग, रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी, डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी और हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
यूजीसी की अधिसूचना में इन डिग्रियों का नाम, अवधि और प्रवेश की योग्यता तय की गई है। इससे अलग-अलग विश्वविद्यालयों में एक ही विषय की डिग्री और उसकी अवधि को लेकर चल रहा अंतर कम होगा।
पीजी में विशेषज्ञता के विकल्प
पीजी स्तर पर भी छात्रों के लिए विशेषज्ञता के विकल्प बढ़ाए गए हैं। मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी में नौ, मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी में आठ, मास्टर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज में चार, मास्टर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी में तीन और मास्टर ऑफ रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी में दो विशेषज्ञताएं शामिल हैं।
डिग्री के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर
एनसीएएचपी ने 28 स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों से जुड़े 18 योग्यता आधारित पाठ्यक्रम पहले ही जारी किए हैं। इनमें अस्पतालों और संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में इंटर्नशिप तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण को महत्व दिया गया है।
इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव देना है।
डीएमएलटी भी शुरू करने का विकल्प
2026-27 से जारी किए गए पाठ्यक्रमों में डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (डीएमएलटी) शुरू करने का विकल्प भी दिया गया है। एनसीएएचपी बाकी पाठ्यक्रमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जिन्हें अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किया जा सकता है।
एनसीएएचपी के अध्यक्ष डॉ. यज्ञ उन्मेश शुक्ला के अनुसार, नए नियमों से देशभर में संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं की पढ़ाई के लिए एक समान व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी और छात्रों को शिक्षा से लेकर करियर तक का स्पष्ट रास्ता मिलेगा।
