हरियाणा में अंतरराज्यीय नवजात तस्करी गिरोह का खुलासा, रायपुर से भी कनेक्शन

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बहादुरगढ़, 19 अगस्त। वाय के न्यूज। हरियाणा पुलिस ने नवजात शिशुओं की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह का नेटवर्क 10 से अधिक राज्यों तक फैला है और अब तक 50 से अधिक नवजातों की खरीद-बिक्री की जानकारी सामने आई है। मामले में गिरोह के कथित सरगना परगट सिंह उर्फ लड्डी को पंजाब के मुक्तसर से गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार परगट सिंह करीब साढ़े चार महीने से फरार था। उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 23 हो गई है। पुलिस ने उसके साथ मुखपाल सिंह उर्फ मुक्खा को भी गिरफ्तार किया है। दोनों को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

बहादुरगढ़ के पुलिस उपायुक्त मयंक मिश्रा के अनुसार गिरोह नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त के लिए एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था। नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर एजेंटों की भूमिका थी। पुलिस के अनुसार एजेंटों को सौदे की रकम का करीब पांच से 10 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों को काम अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया था, ताकि पूरी गतिविधि की जानकारी किसी एक व्यक्ति के पास न रहे।

रायपुर का कनेक्शन

मामले की शुरुआती जांच में छत्तीसगढ़ का कनेक्शन भी सामने आया था। हरियाणा पुलिस ने रुद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया था, जिसका पता सेक्टर-27, रायपुर बताया गया है। पुलिस के अनुसार वह गिरोह के नेटवर्क से जुड़ा था।

हालांकि, उपलब्ध पुलिस-आधारित जांच रिपोर्टों में अब तक छत्तीसगढ़ में किसी नवजात की खरीद या बिक्री होने की पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जांच में जिन राज्यों में नवजातों की खरीद-बिक्री के मामले सामने आने की बात कही गई थी, उनमें हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश का उल्लेख था।

कई राज्यों तक नेटवर्क

पुलिस के अनुसार गिरोह के तार पंजाब से महाराष्ट्र तक 10 से अधिक राज्यों से जुड़े हैं। उपलब्ध जांच रिपोर्टों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात समेत कई राज्यों में नेटवर्क के संपर्क सामने आने की बात कही गई है। हालांकि पुलिस ने सार्वजनिक रूप से 10 से अधिक राज्यों की पूरी सूची जारी नहीं की है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह कथित तौर पर गोद लेने की प्रक्रिया का इस्तेमाल बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त को छिपाने के लिए करता था। मामले में पांच ऐसे माता-पिता की गिरफ्तारी भी हुई है, जिन्होंने बच्चों को कथित रूप से अवैध तरीके से गोद लिया था।

पुलिस अब गिरोह की पूरी श्रृंखला, बच्चों के जैविक माता-पिता, बिचौलियों और कथित खरीदारों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि कितने बच्चों की खरीद-बिक्री हुई और उन्हें किन-किन राज्यों में पहुंचाया गया।

पुलिस के अनुसार अब तक सामने आया 50 से अधिक नवजातों की खरीद-बिक्री का आंकड़ा जांच में सामने आया अनुमान/दावा है। अंतिम संख्या जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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