स्तनपान को लेकर बड़ी चुनौती, सिर्फ 49% नवजातों को जन्म के एक घंटे में मिलता है मां का दूध

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भिलाई में राज्य स्तरीय कार्यशाला, करीब 100 नर्सिंग विद्यार्थियों और कर्मियों को दिया प्रशिक्षण

भिलाई, 12 अगस्त 2026 (वाय के न्यूज)। छत्तीसगढ़ में नवजात शिशुओं के स्तनपान को लेकर जागरूकता और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण की जरूरत अब भी बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार राज्य में केवल करीब 49 प्रतिशत नवजातों को जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध मिल पाता है, जबकि सिर्फ 25 प्रतिशत शिशुओं को छह माह तक विशेष स्तनपान कराया जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए भिलाई में स्तनपान एवं लैक्टेशन प्रबंधन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (JLN Hospital and Research Centre), भिलाई ने स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के सहयोग से इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें करीब 100 नर्सिंग विद्यार्थियों और नर्सिंग कर्मियों को स्तनपान के वैज्ञानिक पहलुओं, व्यावहारिक प्रबंधन तथा प्रसव के बाद माताओं को उचित परामर्श और सहयोग देने का प्रशिक्षण दिया गया।

वैज्ञानिक जानकारी से दूर होंगी भ्रांतियां

कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि लैक्टेशन प्रबंधन पर केंद्रित प्रशिक्षण से स्वास्थ्यकर्मियों की दक्षता बढ़ने के साथ माताओं को वैज्ञानिक और सही जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि उचित परामर्श के जरिए स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है। इससे दस्त, निमोनिया और कुपोषण जैसी समस्याओं से जुड़े शिशु रोग और मृत्यु के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

जन्म के एक घंटे में स्तनपान पर जोर

यह पहल केंद्र सरकार के मदर्स एब्सोल्यूट अफेक्शन (MAA) कार्यक्रम और पोषण अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप है। इन कार्यक्रमों के तहत जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने और बच्चे के जीवन के पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने को प्रोत्साहित किया जाता है।

‘बेबी-फ्रेंडली’ अस्पतालों की भूमिका अहम

तकनीकी सत्रों का संचालन शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. माला चौधरी ने किया। उन्होंने बेबी-फ्रेंडली हॉस्पिटल इनिशिएटिव (BFHI) की भूमिका पर प्रकाश डाला। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की पहल है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में स्तनपान को बढ़ावा देना, उसका संरक्षण करना और माताओं को प्रभावी सहयोग एवं परामर्श उपलब्ध कराना है।

कार्यशाला में ‘सफल स्तनपान के लिए 10 कदम’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जानकारी दी गई। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र, भिलाई को BFHI के तहत प्रमाणन प्राप्त है।

प्रशिक्षण में व्यावहारिक कौशल पर फोकस

स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद पी. सावंत और अधीक्षक डॉ. संजय गोयल ने प्रतिभागियों को बच्चे को सही तरीके से स्तन से लगाने की तकनीक, स्तनपान के दौरान आने वाली सामान्य समस्याओं के प्रबंधन और नई माताओं को प्रभावी परामर्श देने का प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान के अलावा केस डिस्कशन, पोस्टर प्रतियोगिता और क्विज भी आयोजित की गई। इसका उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल में बदलना था, ताकि वे प्रसव के बाद माताओं और नवजातों को समय पर सही सहयोग और मार्गदर्शन दे सकें।

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