अब फ्लोटिंग सोलर और ऊर्जा भंडारण पर सरकार का बड़ा दांव
नई दिल्ली, 2 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र पिछले एक दशक में अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है। वर्ष 2014 में जहां देश की स्थापित सौर क्षमता लगभग 3 गीगावाट थी, वहीं 30 जून 2026 तक यह बढ़कर 162.15 गीगावाट पहुंच गई। क्षमता विस्तार, घरेलू विनिर्माण, प्रतिस्पर्धी टैरिफ और उपभोक्ता भागीदारी के बल पर भारत अब दुनिया के प्रमुख सौर ऊर्जा बाजारों में शामिल हो चुका है।
इस यात्रा को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS) के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित की जाएगी। योजना पर 5,070 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा।
जलाशयों पर बनेगी नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना का उद्देश्य बड़े जलाशयों और औद्योगिक जल निकायों की सतह का उपयोग कर बिजली उत्पादन बढ़ाना है। प्रत्येक परियोजना में कम से कम दो घंटे (10,000 मेगावाट-घंटे) की ऊर्जा भंडारण क्षमता होगी, जिससे चरम मांग के समय भी बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के आकलन के अनुसार देश में जलाशयों और अन्य उपयुक्त जल निकायों में लगभग 102.18 गीगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि योजना से हर वर्ष लगभग एक करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी और 16 से 17 हजार पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार सृजित होंगे।
रिकॉर्ड गति से बढ़ा सौर क्षेत्र
वित्त वर्ष 2025-26 भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक रहा। इस दौरान 44.61 गीगावाट नई सौर क्षमता जोड़ी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। वर्ष 2025 में वार्षिक क्षमता वृद्धि के आधार पर भारत अमेरिका से आगे निकलते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर विकास बाजार बनकर उभरा।
मार्च 2026 तक देश की कुल गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता 283.46 गीगावाट हो गई, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान है।
घरेलू विनिर्माण को मिली नई ताकत
सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और अन्य नीतियों के कारण सौर उपकरण निर्माण में भी तेज़ वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता लगभग 2.3 गीगावाट थी, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर लगभग 172 गीगावाट हो गई। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिला है।
सोलर पार्कों का विस्तार
देश में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए 54 सोलर पार्क स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 39,188 मेगावाट है। राजस्थान का भड़ला, कर्नाटक का पावागड़ा और मध्य प्रदेश का रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क देश की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में भी 100 मेगावाट क्षमता वाले सोलर पार्क को स्वीकृति दी गई है। साथ ही राज्य के बड़े जलाशयों में भविष्य में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
घर-घर पहुंची सौर ऊर्जा
पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के तहत जून 2026 तक 43 लाख परिवार रूफटॉप सोलर से जुड़ चुके हैं। दिसंबर 2025 तक 14,771.82 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता वितरित की जा चुकी थी और 7.7 लाख से अधिक परिवारों का बिजली बिल शून्य हो चुका था।
किसानों को मिला लाभ
पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से अब तक लगभग 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सौर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 15.89 लाख कृषि पंप फीडर-स्तर पर सौर ऊर्जा से जुड़े हैं। योजना से 21.77 लाख किसानों को लाभ मिला है और किसानों की भूमि पर 1,726 मेगावाट विकेंद्रीकृत सौर क्षमता स्थापित की गई है।
सस्ती हुई सौर बिजली
सौर ऊर्जा की लागत में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। वर्ष 2010 में जहां सौर बिजली का टैरिफ लगभग 18 रुपये प्रति यूनिट था, वहीं प्रतिस्पर्धी ई-रिवर्स नीलामी व्यवस्था के कारण यह घटकर 2.44 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गया। इससे भारत दुनिया के सबसे कम लागत वाले सौर ऊर्जा बाजारों में शामिल हो गया है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारत की भूमिका
भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG) जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दी है। साथ ही भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान वर्ष 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने के लक्ष्य पर सहमति बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2030 और 2070 के लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति में सौर ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के माध्यम से फ्लोटिंग सोलर, ऊर्जा भंडारण और ग्रिड स्थिरता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
फैक्ट बॉक्स : भारत की सौर उपलब्धियां
| बिंदु | स्थिति |
|---|---|
| स्थापित सौर क्षमता | 162.15 गीगावाट (30 जून 2026) |
| 2025-26 में नई क्षमता | 44.61 गीगावाट |
| प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना | 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर |
| ऊर्जा भंडारण | 10,000 मेगावाट-घंटे (2 घंटे) |
| योजना लागत | ₹5,070 करोड़ |
| रूफटॉप सोलर से जुड़े परिवार | 43 लाख |
| पीएम-कुसुम से लाभान्वित किसान | 21.77 लाख |
| स्वीकृत सोलर पार्क | 54 |
| सोलर पार्क क्षमता | 39,188 मेगावाट |
| घरेलू मॉड्यूल निर्माण क्षमता | लगभग 172 गीगावाट |
| संभावित वार्षिक CO₂ कमी | लगभग 1 करोड़ टन |
