नए वैधानिक आयोग के गठन का दिया सुझाव
नई दिल्ली, 4 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने फ़ार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि जब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) का गठन किया जा चुका है, तो PCI की जगह भी नया वैधानिक नेशनल फ़ार्मेसी कमीशन क्यों नहीं बनाया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ PCI की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि फ़ार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 12 के तहत किसी फ़ार्मेसी पाठ्यक्रम को एक बार मंजूरी मिलने के बाद संस्थान को हर वर्ष मंजूरी का नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि PCI के मौजूदा ढांचे और कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की जरूरत है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि परिषद के वर्तमान स्वरूप में निहित स्वार्थों की आशंका बनी रहती है और बिना पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं वाले संस्थानों को अनुमति मिलने से फ़ार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों का सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर पड़ता है।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि नेशनल फ़ार्मेसी कमीशन बिल, 2026 लंबित है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था नेशनल मेडिकल कमीशन की तर्ज पर तैयार की गई है और संसद के मौजूदा सत्र में इस पर विचार हो सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसे फ़ार्मेसी संस्थानों के निरीक्षण से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हर वर्ष निरीक्षण के नाम पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था पर सवाल उठाए। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह इस विषय पर PCI से चर्चा कर अदालत को अवगत कराएंगे।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि किसी तीन या चार वर्षीय पाठ्यक्रम की मान्यता को हर वर्ष अलग-अलग मंजूरी में नहीं बदला जा सकता। हालांकि, यदि बाद में निरीक्षण के दौरान किसी संस्थान में कमियां मिलती हैं, तो PCI के पास नियमानुसार कार्रवाई करने का अधिकार बना रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त के बाद निर्धारित की है। अंतरिम तौर पर अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि PCI को फ़ार्मेसी संस्थानों से पहले ही वसूले जा चुके Pharmacy Education Regulatory Charges (PERC) वापस करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार पहले ही नेशनल फ़ार्मेसी कमीशन बिल, 2026 का मसौदा सार्वजनिक कर चुकी है। प्रस्तावित कानून के तहत वर्तमान फ़ार्मेसी एक्ट, 1948 को निरस्त कर PCI की जगह नेशनल फ़ार्मेसी कमीशन गठित करने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह विधेयक अभी संसद से पारित होना बाकी है।
