2569 किमी मार्ग पर कवच-4.0 सक्रिय
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। भारतीय रेल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीकी उन्नयन, आधुनिक सिग्नल प्रणाली और बेहतर रखरखाव उपायों के परिणामस्वरूप ट्रेन दुर्घटनाओं में लगातार कमी आई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 में जून 2026 तक अब तक केवल दो बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं।
रेल मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-15 में ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी, जो वर्ष 2025-26 में घटकर 16 रह गई। इस तरह दुर्घटनाओं में करीब 88 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं परिणामी दुर्घटना सूचकांक भी वर्ष 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 रह गया है।

दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर कवच-4.0
रेल सुरक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक आधारित कवच ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली को तेजी से लागू किया जा रहा है। रेल मंत्रालय के अनुसार 20 जुलाई 2026 तक कवच-4.0 को 2569 रूट किलोमीटर रेल मार्ग पर सफलतापूर्वक चालू किया जा चुका है।
इसमें देश के दो सबसे व्यस्त रेल मार्ग शामिल हैं—
- दिल्ली-मुंबई मार्ग – 1423 किलोमीटर
- दिल्ली-हावड़ा मार्ग – 1146 किलोमीटर
कवच प्रणाली लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेन संचालन में सहायता करती है। यदि किसी स्थिति में गति नियंत्रण नहीं हो पाता तो यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगाने में सक्षम है। खराब मौसम और कम दृश्यता की स्थिति में भी यह सुरक्षित संचालन में मदद करती है।
रेल मंत्रालय के अनुसार कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे उच्चतम सुरक्षा स्तर SIL-4 प्रमाणन प्राप्त है। कवच-4.0 में बेहतर लोकेशन सटीकता, बड़े यार्ड में सिग्नल की जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से सीधा इंटरफेस जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।

21,858 किलोमीटर रेल मार्ग पर कवच विस्तार
रेलवे ने देश के सभी गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई डेंसिटी नेटवर्क और चिन्हित रेल खंडों सहित 21,858 रूट किलोमीटर पर कवच लगाने का काम शुरू किया है।
अब तक कवच से जुड़े कार्यों में—
- 11,253 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई
- 1668 दूरसंचार टावर स्थापित किए गए
- 988 स्टेशनों पर डेटा सेंटर तैयार किए गए
- 7726 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड उपकरण लगाए गए
- 6153 लोकोमोटिव में कवच लगाया गया
इसके अलावा 7327 लोकोमोटिव और 1200 ईएमयू/एमईएमयू में कवच लगाने का काम शुरू किया गया है।
94 हजार से अधिक कर्मचारियों को प्रशिक्षण
कवच प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए रेलवे के केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अब तक 94 हजार से अधिक तकनीशियन, ऑपरेटर और इंजीनियरों को कवच तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें करीब 57 हजार लोको पायलट और सहायक लोको पायलट शामिल हैं।
सुरक्षा बजट में लगातार वृद्धि
रेल सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए बजट में भी लगातार बढ़ोतरी की गई है।
| वर्ष | सुरक्षा संबंधी व्यय (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| 2013-14 | 39,200 |
| 2023-24 | 1,01,662 |
| 2024-25 | 1,14,022 |
| 2025-26 | 1,17,693 |
| 2026-27 | 1,20,389 |
सिग्नलिंग और ट्रैक सुरक्षा में सुधार
रेल मंत्रालय के अनुसार मानव त्रुटि से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए—
- 6671 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक/विद्युत इंटरलॉकिंग प्रणाली उपलब्ध कराई गई है।
- 10,395 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की गई है।
- 6671 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग व्यवस्था की गई है।
- सभी लोकोमोटिव में लोको पायलट सतर्कता के लिए विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस (VCD) लगाए गए हैं।
पटरियों और कोच सुरक्षा पर जोर
रेलवे ने ट्रैक सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया है। अल्ट्रासोनिक दोष पहचान (USFD) प्रणाली से रेल पटरियों और वेल्ड की जांच की जा रही है।
रेल मंत्रालय के अनुसार 2014-26 के दौरान—
- 60 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली रेलों का उपयोग बढ़कर 1.63 लाख किलोमीटर हुआ।
- 260 मीटर लंबे रेल पैनलों का उपयोग बढ़कर 87,219 किलोमीटर हुआ।
- वेल्ड विफलताओं में वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2025-26 में 93 प्रतिशत कमी आई।
- रेल पटरियों में दरारों के मामलों में 92 प्रतिशत कमी दर्ज की गई।
मानवरहित क्रॉसिंग समाप्त, एलएचबी कोचों का विस्तार
रेलवे ने बताया कि ब्रॉड गेज मार्गों पर सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग को जनवरी 2019 तक समाप्त कर दिया गया है। पुराने आईसीएफ डिजाइन के कोचों की जगह एलएचबी कोचों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
वर्ष 2004-14 के दौरान जहां 2337 एलएचबी कोच बनाए गए थे, वहीं 2014-26 के दौरान यह संख्या बढ़कर 49,366 हो गई।
रोलिंग ब्लॉक व्यवस्था से बेहतर रखरखाव
रेलवे ने सुरक्षित संचालन के लिए वर्ष 2023 में रोलिंग ब्लॉक व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत ट्रैक, कोच और अन्य परिसंपत्तियों के रखरखाव और मरम्मत की योजना 52 सप्ताह पहले तैयार कर लागू की जाती है।
रेल मंत्री ने कहा कि तकनीकी सुधार, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर रखरखाव व्यवस्था के जरिए भारतीय रेल में सुरक्षा को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
