पुणे, जयपुर और जोधपुर की रेलवे लॉन्ड्री में शुरू हुआ एआई पायलट प्रोजेक्ट, दागदार बेडरोल यात्रियों तक पहुंचने से पहले ही होंगे अलग
नई दिल्ली, 24 जुलाई, 2026 (वाय के न्यूज)। ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को अब पहले से ज्यादा साफ-सुथरा बेडरोल मिलेगा। भारतीय रेलवे ने धुले हुए बेडशीट, तकिया कवर और तौलियों की गुणवत्ता जांचने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित दाग पहचान प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
पहले चरण में यह तकनीक पुणे, जयपुर और जोधपुर रेल मंडलों की मशीनीकृत लॉन्ड्री में लागू की गई है। यहां एआई कैमरे धुलाई के बाद कपड़ों पर बचे दागों की पहचान करेंगे। दागदार या मानक के अनुरूप नहीं पाए गए बेडरोल को यात्रियों तक पहुंचने से पहले ही अलग कर दिया जाएगा।
रेलवे पहले से सभी मशीनीकृत लॉन्ड्री में कपड़ों की सफेदी और धुलाई की गुणवत्ता जांचने के लिए व्हाइटो-मीटर का इस्तेमाल करता है। साथ ही लॉन्ड्री की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
रेलवे ने एक अन्य पायलट पहल के तहत उत्तर पश्चिम रेलवे की ट्रेनों और कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में एसी श्रेणी के सभी यात्रियों को हर यात्रा में कंबल उपलब्ध कराना भी शुरू किया है। रेलवे के अनुसार इस पहल को यात्रियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बेडशीट, तकिया कवर, तौलिया, तकिया और कंबल की तय उपयोग अवधि होती है। अवधि पूरी होने या अनुपयुक्त पाए जाने पर इन्हें बदल दिया जाता है।
रेलवे का कहना है कि एआई आधारित यह नई व्यवस्था यात्रियों को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाला बेडरोल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
