रेयर अर्थ मैग्नेट में चीन के दबदबे को चुनौती देगा भारत

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20 कंपनियों ने लगाई बोली, 7,280 करोड़ की योजना से देश में 6 हजार टन सालाना उत्पादन क्षमता बनाने की तैयारी

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026। वाय के न्यूज। इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के क्षेत्र में भारत अब अपनी निर्भरता कम करने की तैयारी कर रहा है। भारी उद्योग मंत्रालय की 7,280 करोड़ रुपये की योजना के तहत देश में इन मैग्नेट के निर्माण के लिए 20 कंपनियों ने बोलियां लगाई हैं।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रेयर अर्थ मैग्नेट की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर लंबे समय से चीन का भारी दबदबा रहा है। भारत के पास रेयर अर्थ संसाधन मौजूद होने के बावजूद खनन से लेकर रिफाइनिंग और तैयार मैग्नेट बनाने तक की पूरी औद्योगिक श्रृंखला विकसित नहीं हो पाई है।

मैग्नेट उत्पादन में चीन सबसे आगे

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार 2024 में चीन की वैश्विक मैग्नेट-ग्रेड रेयर अर्थ उत्पादन में करीब 60 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। रेयर अर्थ की रिफाइनिंग में उसकी हिस्सेदारी करीब 91 प्रतिशत, जबकि स्थायी मैग्नेट निर्माण में करीब 94 प्रतिशत थी।

यही कारण है कि रेयर अर्थ की आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों को प्रभावित कर सकता है।

भारत में बनेगी पूरी उत्पादन श्रृंखला

भारत सरकार की नई योजना का उद्देश्य केवल मैग्नेट बनाने की फैक्ट्री लगाना नहीं, बल्कि रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी घरेलू उत्पादन श्रृंखला विकसित करना है।

योजना के तहत देश में कुल 6,000 मीट्रिक टन सालाना क्षमता वाले एकीकृत सिन्टर्ड एनडीएफईबी रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर अधिकतम पांच लाभार्थियों का चयन होगा। प्रत्येक को अधिकतम 1,200 टन सालाना क्षमता दी जा सकेगी।

भारी उद्योग मंत्रालय ने इसके लिए 20 मार्च 2026 को प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया था। बोली जमा करने की अंतिम तारीख 12 अगस्त थी और तकनीकी बोलियां 13 अगस्त को खोली गईं।

सात साल की योजना

केंद्र सरकार ने 25 नवंबर 2025 को योजना को मंजूरी दी थी। इसके लिए 7,280 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना सात साल की होगी। इसमें दो साल संयंत्र स्थापित करने और अगले पांच साल उत्पाद की बिक्री पर प्रोत्साहन देने के लिए हैं।

भारत के लिए क्यों जरूरी?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट छोटे आकार में बहुत अधिक शक्ति देने वाले मैग्नेट होते हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर, पवन टर्बाइन, हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में होता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विस्तार के साथ इनकी मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत को आयात पर निर्भरता घटाने और इन महत्वपूर्ण उद्योगों के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

भारत के सामने चुनौती अब केवल मैग्नेट बनाने की नहीं, बल्कि उस पूरी औद्योगिक श्रृंखला को विकसित करने की है जिस पर आज चीन का सबसे बड़ा नियंत्रण है।

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