मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह पर रोक की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

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नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह (पॉलिगैमी) की प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं जैकी सोमन, डॉ. नूरजहां साफिया नियाज़ और अन्य की ओर से दायर याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 की धारा 2 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रावधान मुस्लिम पुरुषों को बहुविवाह की अनुमति देता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 82 से संबंधित प्रावधान सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू किए जाएं, ताकि बहुविवाह के संबंध में कानून का एक समान अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और उसके बाद मामले की अगली सुनवाई की जाएगी।


मामले का महत्व


यह मामला व्यक्तिगत कानून, महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और समानता के सिद्धांत से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने का अर्थ है कि अदालत ने याचिका पर विचार करने योग्य प्रश्न पाया है और केंद्र सरकार से उसका पक्ष मांगा है।

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