माल ढुलाई में इलेक्ट्रिक ट्रकों को रफ्तार, नीति आयोग ने शुरू किया PACT

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शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के लिए मांग, चार्जिंग और वित्तपोषण को एक मंच पर लाने की पहल; ई-ट्रकों की संख्या एक साल में चार गुना से ज्यादा बढ़ी

नई दिल्ली, 7 सितंबर, वाय के न्यूज। भारत में माल ढुलाई के क्षेत्र को इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में नीति आयोग ने PACT (Partnership for Accelerated Clean Transportation) की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के लिए माल ढुलाई की मांग को एकजुट करना और वाहन निर्माता, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, वित्तीय संस्थान तथा चार्जिंग ऑपरेटरों को एक साझा मंच पर लाना है।

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने सोमवार को 5वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 में PACT लॉन्च किया। इसके साथ ही ZET Marketplace भी शुरू किया गया, जहां ई-ट्रक निर्माता, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता, चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटर, वित्तदाता और तकनीकी कंपनियां कारोबारी साझेदारी तलाश सकेंगी।

एक साल में चार गुना बढ़े ई-फ्रेट वाहन

ई-फास्ट इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ई-फ्रेट वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025 में जहां 201 ई-फ्रेट वाहन इस्तेमाल में थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 826 हो गई। फिलहाल देशभर में 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक मध्यम और भारी मालवाहक (ई-एमएचडी) ट्रक परिचालन में हैं।

नीति आयोग के मुताबिक इस वृद्धि को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए केवल वाहन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए माल ढुलाई की मांग को एक जगह लाना, प्रमुख माल ढुलाई कॉरिडोर पर चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना, वित्तपोषण को आसान बनाना और फ्लीट ऑपरेटरों के लिए निवेश संबंधी जोखिम कम करना जरूरी होगा।

चार्जिंग और वित्तपोषण पर भी जोर

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि इलेक्ट्रिक माल ढुलाई को बढ़ाने के लिए लॉजिस्टिक्स संचालन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के वित्तपोषण और बैटरी प्रबंधन में नए मॉडल विकसित करने की जरूरत है। बैटरी निगरानी प्रणाली और ज्यादा उपयोग वाले वाहनों के लिए नए परिचालन मॉडल से वित्तीय जोखिम कम करने और निवेश बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

राजीव गौबा ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षमता और नीतिगत ढांचे में प्रगति हुई है, लेकिन अगले चरण में विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग जरूरी होगा। उनके मुताबिक नवीन वित्तपोषण मॉडल, कॉरिडोर आधारित चार्जिंग नेटवर्क और बाजार आधारित साझेदारियां ई-ट्रकों के व्यावसायिक इस्तेमाल को गति दे सकती हैं।

पायलट परियोजनाओं से बड़े स्तर के बाजार की ओर

ई-फास्ट इंडिया समिट में वित्तपोषण और जोखिम कम करने के उपायों, चार्जिंग नेटवर्क, नीतिगत प्राथमिकताओं और शुरुआती परियोजनाओं से मिले अनुभवों पर चर्चा हुई। जोर इस बात पर रहा कि इलेक्ट्रिक माल ढुलाई को अलग-अलग पायलट परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और बड़े पैमाने के मॉडल में बदला जाए।

PACT और ZET Marketplace के जरिए नीति आयोग का लक्ष्य माल ढुलाई की वास्तविक मांग, निवेश और उपलब्ध तकनीक को जोड़कर देशभर में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।

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