महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर अब पति-पुत्र या परिजनों को प्रतिनिधि बनाने पर रोक

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

रायपुर, 10 अगस्त 2026। वाय के न्यूज । नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति, पुत्र-पुत्री या दूसरे परिजनों के जरिए कामकाज करने की व्यवस्था पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी है। राज्य के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इससे संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है।

छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, किसी भी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन या किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य अथवा नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में नामित या नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।

नए नियम के लागू होने के बाद महिला जनप्रतिनिधि की ओर से उनके किसी परिजन के प्रतिनिधि के रूप में काम करने की व्यवस्था पर रोक रहेगी। इसका दायरा राज्य के सभी नगरीय निकायों पर होगा।

महिला प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर अहम फैसला

राज्य शासन ने यह बदलाव छत्तीसगढ़ नगरपालिक (लोकसभा सदस्य या राज्य विधानसभा के सदस्य या राज्यसभा के सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अर्हताएं) नियम, 2022 में संशोधन के जरिए किया है।

अधिसूचना के अनुसार, संशोधित प्रावधान राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही प्रभावी हो गया है।

इस फैसले का सीधा असर उन व्यवस्थाओं पर पड़ेगा, जिनमें निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की जगह उनके पति या परिवार के किसी अन्य सदस्य के जरिए बैठकों, अधिकारियों से संपर्क अथवा नगरीय निकाय से जुड़े कामकाज में प्रतिनिधित्व किया जाता रहा है।

अब संबंधित महिला जनप्रतिनिधि को ही अपने पद से जुड़े दायित्वों और प्रतिनिधित्व की भूमिका निभानी होगी।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर