महानदी की कोख में तेल-गैस की तलाश शुरू

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समुद्र की गहराइयों में उतरा पहला कुआं


नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। भारत ने समुद्र की गहराइयों में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस भंडारों की तलाश की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। बंगाल की खाड़ी में स्थित महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन कुएं की खुदाई शुरू हो गई है। यह कुआं इस क्षेत्र में तेल और गैस की संभावनाओं का आकलन करेगा।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस ड्रिलिंग की शुरुआत को भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि समुद्र के भीतर खोदा जाने वाला हर मीटर भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के करीब ले जाएगा और तेल-गैस के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।


चार गहरे समुद्री कुओं से होगी खोज


महानदी अपतटीय बेसिन में कुल चार गहरे समुद्री मूल्यांकन कुओं की खुदाई की योजना है। पहले कुएं के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि समुद्र के नीचे मौजूद हाइड्रोकार्बन संसाधन कितने बड़े हैं और उनका व्यावसायिक उत्पादन संभव है या नहीं। इसके लिए आधुनिक डीपवाटर ड्रिलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।


ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम


भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर नए तेल और गैस भंडारों की खोज को ऊर्जा सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि नए भंडार मिलने पर देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ेगा तथा आयात बिल कम करने में मदद मिलेगी।


पिछले दशक में बढ़ी तेल-गैस खोज


पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक दशक में तेल और गैस खोज के क्षेत्र में कई नीतिगत बदलाव किए गए हैं। इनमें हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP), ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (OALP) और समुद्री क्षेत्रों में खोज के लिए नए अवसर उपलब्ध कराना शामिल है।
सरकार के मुताबिक अब तक 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 172 अन्वेषण ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक निवेश हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में 674 कुओं की खुदाई, पांच नए तेल-गैस भंडारों की खोज और सात नए क्षेत्रों से उत्पादन शुरू होने की जानकारी दी गई है।


महानदी बेसिन पर क्यों नजर?


महानदी अपतटीय बेसिन को भारत के संभावनाशील समुद्री ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जा रहा है। इस क्षेत्र में पहले से हुए भू-वैज्ञानिक सर्वे और खोज गतिविधियों के आधार पर अब गहरे समुद्र में विस्तृत मूल्यांकन शुरू किया गया है।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह अभियान केवल किसी एक खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और निरंतर प्रयासों के जरिए भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम है।

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