भारत WPI से PPI प्रणाली की ओर बढ़ा
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2026 (वाय के डेस्क)। महंगाई मापने की अपनी दशकों पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। केंद्र सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के साथ पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) लागू कर दिया है। अगले पांच वर्षों तक दोनों सूचकांक साथ-साथ जारी किए जाएंगे। इसके बाद सरकार की योजना WPI की जगह PPI को प्रमुख मूल्य सूचकांक के रूप में अपनाने की है।
नई व्यवस्था के तहत उत्पादों की कीमतों का आकलन अब केवल थोक बाजार के आधार पर नहीं, बल्कि उत्पादन स्थल (फैक्ट्री गेट) से किया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि किसी वस्तु को बनाने में उत्पादक की वास्तविक लागत और बिक्री मूल्य में कितना बदलाव आया है। पहली बार सेवा क्षेत्र को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
सरकार ने WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। साथ ही इसमें शामिल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है, ताकि अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाया जा सके।
क्या बदलेगा?
नई PPI प्रणाली तीन हिस्सों पर आधारित है—
- आउटपुट PPI: उत्पादक जिस कीमत पर अपना उत्पाद बेचता है।
- इनपुट PPI: कच्चे माल और उत्पादन लागत में बदलाव।
- सर्विस PPI: बैंकिंग, बीमा, रेलवे, विमानन, दूरसंचार समेत सात प्रमुख सेवा क्षेत्रों की कीमतों में बदलाव।
इसका असर किस पर पड़ेगा?
इस बदलाव से आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की कीमतों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन आने वाले वर्षों में सरकारी खरीद, निर्माण परियोजनाओं, औद्योगिक अनुबंधों, लागत समायोजन और मूल्य वृद्धि से जुड़े कई समझौतों में धीरे-धीरे PPI का उपयोग बढ़ सकता है। इससे उत्पादकों की लागत का अधिक सटीक आकलन संभव होगा और मूल्य निर्धारण प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल WPI समाप्त नहीं किया जा रहा है। पांच वर्ष के संक्रमण काल में WPI और PPI दोनों समानांतर जारी रहेंगे। इस दौरान उद्योग, सरकारी विभाग और अन्य संस्थाएं नई प्रणाली के अनुरूप अपने अनुबंधों और प्रक्रियाओं को धीरे-धीरे ढाल सकेंगी।
