तेजस, सुखोई-30 और राफेल के साथ ‘वीर गार्जियन-2026’ में जापानी वायुसेना की भागीदारी; हिंद-प्रशांत में बढ़ते सामरिक तालमेल का संकेत
नई दिल्ली, 10 सितंबर। वाय के न्यूज़।
भारत-जापान रक्षा साझेदारी में एक नया कदम सामने आया है। जापान के एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के F-2A लड़ाकू विमान पहली बार भारत पहुंचे हैं और जोधपुर में भारतीय वायुसेना के साथ संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन-2026’ में हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास 22 सितंबर तक चलेगा।
भारतीय वायुसेना की ओर से अभ्यास में तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं। अभ्यास का उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच परिचालन तालमेल, सामरिक प्रशिक्षण और आपसी समझ को मजबूत करना है।
राजनाथ सिंह ने बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापानी लड़ाकू विमानों की भारत यात्रा को भारत-जापान रक्षा साझेदारी में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि पिछले महीने नई दिल्ली में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के साथ हुई बातचीत के बाद यह सहयोग आगे बढ़ा है। उन्होंने ‘वीर गार्जियन’ जैसे पारस्परिक सैन्य अभ्यासों को दोनों देशों के बीच तालमेल मजबूत करने वाला बताया।
चीन का नाम नहीं, लेकिन क्षेत्रीय संदेश अहम
भारत और जापान इस अभ्यास को किसी देश के खिलाफ सैन्य गतिविधि के रूप में पेश नहीं कर रहे हैं। आधिकारिक स्तर पर जोर दोनों देशों की वायु सेनाओं की क्षमता, आपसी तालमेल और हिंद-प्रशांत में शांति एवं स्थिरता पर है।
फिर भी रणनीतिक दृष्टि से जापानी लड़ाकू विमानों का पहली बार भारत आना महत्वपूर्ण है। भारत और जापान दोनों हिंद-प्रशांत में स्वतंत्र, खुले और नियम आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था की बात करते रहे हैं। ऐसे में यह अभ्यास चीन का नाम लिए बिना क्षेत्र में बढ़ते सामरिक सहयोग का संकेत माना जा सकता है।
सिर्फ विमान भेजना नहीं, बढ़ रहा सैन्य तालमेल
‘वीर गार्जियन’ की खासियत यह है कि इसमें दोनों देश केवल लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन नहीं कर रहे, बल्कि वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ काम करने की क्षमता बढ़ा रहे हैं।
जापानी F-2 और भारतीय तेजस, सुखोई-30 एमकेआई तथा राफेल की संयुक्त भागीदारी दोनों देशों के हवाई सहयोग को पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक स्तर पर ले जाती है। जापानी दल इससे पहले C-2 परिवहन विमानों के जरिए जोधपुर पहुंचा था।
हिंद-प्रशांत में साझेदारी का विस्तार
भारत और जापान के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार व्यापक हुए हैं। हवाई अभ्यास के साथ दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सूचना साझा करने और सैन्य सहयोग के अन्य क्षेत्रों में भी तालमेल बढ़ा रहे हैं।
इस लिहाज से ‘वीर गार्जियन-2026’ को केवल एक संयुक्त हवाई अभ्यास के बजाय भारत-जापान के बढ़ते रणनीतिक भरोसे के एक और संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
