नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026 (वाय के न्यूज डेस्क) । भारत के पश्चिमी घाट में वैज्ञानिकों ने लाइकेन बनाने वाली कवक (Lichen-forming fungi) की पांच नई प्रजातियों की खोज की है। यह खोज देश की जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और जीव विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसकी जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दी है।
यह शोध अगरकर अनुसंधान संस्थान (Agharkar Research Institute-ARI), पुणे के वैज्ञानिकों ने किया। यह संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन कार्य करता है। शोधकर्ताओं ने Allographa (एलोग्राफा) जीनस पर पश्चिमी घाट का पहला व्यापक डीएनए आधारित (मॉलिक्यूलर फाइलोजेनेटिक) अध्ययन किया। इसी दौरान पांच नई प्रजातियों की पहचान हुई।
नई प्रजातियों के नाम Allographa keralensis, Allographa nayakae, Allographa paraconsanguinea, Allographa persistinspersa और Allographa semicarbonista हैं। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने पहले से ज्ञात पांच प्रजातियों का नया आनुवंशिक (मॉलिक्यूलर) डेटा भी तैयार किया है, जिससे उनकी पहचान और वर्गीकरण अधिक सटीक हो सकेगा।
लाइकेन क्या है?
लाइकेन कोई एक जीव नहीं, बल्कि कवक (Fungus) और शैवाल (Algae) या सायनोबैक्टीरिया के सहजीवी संबंध से बनने वाला जीव है। यह आमतौर पर पेड़ों की छाल, चट्टानों और पुरानी दीवारों पर उगा दिखाई देता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
लाइकेन बनाने वाली कवक वायु प्रदूषण और पर्यावरण में होने वाले बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। इसलिए इन्हें पर्यावरण की गुणवत्ता का जैव संकेतक (Bio-indicator) माना जाता है। इनकी मौजूदगी किसी क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का संकेत देती है।
पश्चिमी घाट दुनिया के प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट में शामिल है। यहां नई प्रजातियों की खोज से यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में अभी भी कई ऐसे जीव मौजूद हैं, जिनकी वैज्ञानिक पहचान होना बाकी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- खोज का क्षेत्र: पश्चिमी घाट
- संस्थान: अगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI), पुणे
- अधीन: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार
- नई खोज: लाइकेन बनाने वाली कवक की 5 नई प्रजातियां
- जीनस: Allographa
- महत्व: पर्यावरण और वायु गुणवत्ता के जैव संकेतक (Bio-indicators)
यह खोज भारत की जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेज को और समृद्ध करती है तथा पर्यावरण संरक्षण और भविष्य के जैविक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराती है।
