नई दिल्ली, 1 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना में जापान की विश्वप्रसिद्ध शिनकान्सेन तकनीक और परिचालन प्रणाली को अपनाया जा रहा है। परियोजना में ट्रैक, विद्युतीकरण, ट्रैक्शन और परिचालन से जुड़ी अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह परियोजना देश में भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की आधारशिला साबित होगी।
परियोजना के तहत पूरे कॉरिडोर में 20 हजार से अधिक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई) मास्ट लगाए जाएंगे। इसमें जापानी शिनकान्सेन मॉडल पर आधारित 2×25 केवी ओवरहेड ट्रैक्शन प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
विद्युत आपूर्ति के लिए 12 ट्रैक्शन सबस्टेशन, दो डिपो ट्रैक्शन सबस्टेशन और 16 वितरण सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे। वहीं, भारत में पहली बार जे-स्लैब बैलेस्टलेस ट्रैक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माना जाता है।

परियोजना के लिए विशेष ट्रैक कंस्ट्रक्शन बेस भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां ट्रैक स्लैब, रेल सामग्री, मशीनरी और अन्य उपकरणों का निर्माण, भंडारण और संचालन किया जाएगा। इसके अलावा गुजरात के साबरमती और सूरत तथा महाराष्ट्र के ठाणे में तीन आधुनिक रोलिंग स्टॉक डिपो बनाए जा रहे हैं।
सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अनुभव के आधार पर केंद्र सरकार ने देश में करीब 4,000 किलोमीटर लंबे सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर चिन्हित किए हैं। इन परियोजनाओं में लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है।
प्रस्तावित कॉरिडोर और अनुमानित यात्रा समय इस प्रकार हैं:
| कॉरिडोर | अनुमानित यात्रा समय |
|---|---|
| दिल्ली–वाराणसी | 3 घंटे 50 मिनट |
| वाराणसी–पटना–सिलीगुड़ी | 2 घंटे 55 मिनट |
| चेन्नई–बेंगलुरु | 1 घंटा 13 मिनट |
| बेंगलुरु–हैदराबाद | 2 घंटे |
| चेन्नई–हैदराबाद | 2 घंटे 55 मिनट |
| मुंबई–पुणे | 48 मिनट |
| पुणे–हैदराबाद | 1 घंटा 55 मिनट |
राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना केवल एक रेल कॉरिडोर नहीं, बल्कि भारत में हाई-स्पीड रेल तकनीक, कौशल और औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की आधार परियोजना है। इस परियोजना से मिले अनुभव के आधार पर भविष्य में देशभर में नए हाई-स्पीड रेल मार्ग विकसित किए जाएंगे। इससे शहरों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, बेहतर संपर्क स्थापित होगा और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्य बातें
- 20,000 से अधिक ओएचई मास्ट लगाए जाएंगे।
- पहली बार जे-स्लैब बैलेस्टलेस ट्रैक तकनीक का उपयोग।
- 12 ट्रैक्शन सबस्टेशन और 18 अन्य विद्युत उपकेंद्र विकसित होंगे।
- साबरमती, सूरत और ठाणे में तीन रोलिंग स्टॉक डिपो।
- 4,000 किमी लंबे सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित।
- प्रस्तावित निवेश लगभग 16 लाख करोड़ रुपये।
