रायपुर, 18 अगस्त। वाय के न्यूज। रेलवे की दुनिया में कई ऐसे काम होते हैं, जो यात्रियों को सीधे दिखाई नहीं देते, लेकिन सुरक्षित और सुचारु ट्रेन परिचालन के लिए उनका महत्व काफी बड़ा होता है। पटरी की सीध और ऊंचाई की जांच, पुल के गर्डर की स्थिति में सुधार, यार्ड में ट्रेनों को एक लाइन से दूसरी लाइन पर ले जाने वाली व्यवस्था को मजबूत करना और लेवल क्रॉसिंग की जगह रोड अंडर ब्रिज बनाना इसी श्रेणी के काम हैं।
रायपुर रेल मंडल में अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच ऐसे ही कई तकनीकी और आधारभूत संरचना संबंधी काम किए गए। इन चार महीनों में मांढर-उरकुरा सेक्शन, बिल्हा और मांढर यार्ड में अलग-अलग काम हुए। इनके साथ ट्रैक की जांच और रखरखाव में इस्तेमाल होने वाली GEDO ट्रॉली की तकनीक को लेकर मंडल स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया गया।

पुल के गर्डर की अलाइनमेंट सुधारी
अप्रैल में मांढर-उरकुरा सेक्शन की मिड लाइन पर ब्रिज क्रमांक 387 के गर्डर की अलाइनमेंट सुधारने का काम पूरा किया गया।
यह सुनने में भले ही पूरी तरह तकनीकी काम लगे, लेकिन पुल के ऊपर से गुजरने वाले रेल ट्रैक के लिए गर्डर की सही स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अलाइनमेंट सुधार का उद्देश्य पुल और ट्रैक की स्थिति को निर्धारित मानकों के अनुरूप बेहतर करना है। रेलवे के अनुसार इससे संबंधित स्थान पर ट्रैक की स्थिति और संरक्षा में सुधार में मदद मिलेगी।

लेवल क्रॉसिंग की जगह बनेगा रोड अंडर ब्रिज
अप्रैल में ही DD-19 लेवल क्रॉसिंग पर रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा किया गया। इसके लिए कट-एंड-कवर पद्धति से बॉक्स इन्सर्शन किया गया। फिलहाल RUB के एप्रोच का काम चल रहा है।
काम पूरा होने के बाद DD-19 लेवल क्रॉसिंग को स्थायी रूप से बंद किया जा सकेगा।
आम लोगों के लिए यह बदलाव खास महत्व रखता है। लेवल क्रॉसिंग पर सड़क यातायात और रेल यातायात एक ही स्थान पर मिलता है। ट्रेन आने पर सड़क यातायात रोकना पड़ता है। RUB बनने के बाद सड़क यातायात को रेल पटरी के नीचे से अलग मार्ग मिलेगा। इससे रेलवे क्रॉसिंग पर रुकने की जरूरत कम होगी और सड़क तथा रेल यातायात को अलग-अलग रास्ता मिलेगा।

बिल्हा में कर्व पर पहली बार थिक वेब स्विच
जून में बिल्हा यार्ड में ट्रैक आधुनिकीकरण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण काम किया गया। यार्ड के पश्चिमी छोर पर प्वाइंट क्रमांक 42B और 41A पर दो थिक वेब स्विच (TWS) लगाए गए।
दोनों स्विच 1.5 डिग्री कर्व पर स्थित हैं। रायपुर रेल मंडल के अनुसार, मंडल में कर्व पर थिक वेब स्विच लगाने का यह पहला अवसर है।
अब सवाल है कि थिक वेब स्विच होता क्या है?
रेलवे यार्ड में कई पटरियां एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। ट्रेन को एक लाइन से दूसरी लाइन पर भेजने के लिए प्वाइंट और स्विच की व्यवस्था काम करती है। थिक वेब स्विच इसी व्यवस्था का अधिक मजबूत प्रकार है। इसे लगाने का उद्देश्य संबंधित ट्रैक संरचना को मजबूत करना और परिचालन के लिहाज से बेहतर व्यवस्था तैयार करना है।
इस बदलाव का महत्व खास तौर पर इसलिए है क्योंकि यार्ड वह जगह है जहां ट्रेनों और कोचों की आवाजाही, लाइन बदलने और अन्य परिचालन गतिविधियां होती हैं।
मांढर यार्ड में क्रॉस-ओवर की लंबाई बढ़ाई गई
जुलाई में मांढर यार्ड के क्रॉस-ओवर क्रमांक 61 की क्रॉस-ओवर लंबाई में सुधार किया गया।
क्रॉस-ओवर को सामान्य भाषा में पटरियों के बीच वह कनेक्शन समझा जा सकता है, जिसके जरिए ट्रेन को एक रेल लाइन से दूसरी रेल लाइन पर ले जाने की सुविधा मिलती है। यार्ड में इस तरह की व्यवस्था का सही ढंग से काम करना ट्रेन परिचालन के लिए महत्वपूर्ण होता है।
रेलवे के अनुसार क्रॉस-ओवर में किए गए इस सुधार से मांढर यार्ड की कार्यक्षमता और परिचालन दक्षता बेहतर होने में मदद मिलेगी।
पटरी की सेहत जांचने में काम आती है GEDO ट्रॉली
इन ढांचागत सुधारों के साथ रायपुर रेल मंडल ने ट्रैक की जांच और रखरखाव से जुड़ी तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया है।
9 जुलाई को GEDO ट्रॉली की कार्यप्रणाली पर मंडल स्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें संबंधित अधिकारी और इंजीनियर शामिल हुए।
GEDO ट्रॉली का उपयोग रेल पथ की गेज, लेवल और अलाइनमेंट मापने के लिए किया जाता है।
इसे सामान्य भाषा में समझें तो रेलवे ट्रैक की तीन बुनियादी चीजों की जांच जरूरी होती है—दोनों पटरियों के बीच की दूरी निर्धारित सीमा में है या नहीं, दोनों पटरियों का स्तर सही है या नहीं और ट्रैक अपनी निर्धारित दिशा में ठीक से है या नहीं।
टैंपिंग मशीन चलाने से पहले क्यों होती है माप?
यह तकनीक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रैक को दुरुस्त करने के लिए इस्तेमाल होने वाली टैंपिंग मशीन को यह जानकारी चाहिए होती है कि ट्रैक में कहां और कितना सुधार करना है।
GEDO ट्रॉली से माप लेने के बाद यह आकलन किया जाता है कि ट्रैक को बेहतर स्थिति में लाने के लिए उसे कितना ऊपर उठाना या कितना स्लीविंग यानी निर्धारित दिशा में खिसकाना आवश्यक है। इसके बाद टैंपिंग मशीन से सुधार का काम अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है।
रायपुर रेल मंडल के अनुसार, पहली बार बाहरी एजेंसी की सहायता से इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए कर्मचारियों और संबंधित तकनीकी अधिकारियों को इसकी कार्यप्रणाली से परिचित कराने के उद्देश्य से सेमिनार आयोजित किया गया।
चार महीनों के काम को एक साथ देखें तो तस्वीर क्या बनती है?
अप्रैल से जुलाई के बीच किए गए इन कामों को अलग-अलग देखें तो ये पुल, ट्रैक, यार्ड और तकनीकी माप से जुड़े अलग-अलग कार्य दिखाई देते हैं। लेकिन इन्हें एक साथ देखने पर रेलवे के उस हिस्से की तस्वीर सामने आती है, जो यात्रियों की नजर से अक्सर ओझल रहता है।
पुल की अलाइनमेंट सुधारना, लेवल क्रॉसिंग की जगह RUB तैयार करना, यार्ड में मजबूत स्विच लगाना, क्रॉस-ओवर में सुधार करना और ट्रैक की सटीक माप के लिए तकनीक का इस्तेमाल—ये सभी रेल अधोसंरचना को बनाए रखने और परिचालन को अधिक सुरक्षित व कुशल बनाने से जुड़े काम हैं।
इनमें से कुछ का लाभ यात्रियों को सीधे दिखाई नहीं देगा। मसलन, किसी पुल के गर्डर की अलाइनमेंट में सुधार या ट्रैक की गेज की जांच ऐसी गतिविधियां हैं जिनका सामान्य यात्री को पता भी नहीं चलता। लेकिन रेलवे जैसे बड़े नेटवर्क में सुरक्षित परिचालन के लिए यही नियमित तकनीकी काम आधार तैयार करते हैं।
रायपुर रेल मंडल के अनुसार अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान किए गए इन कार्यों का उद्देश्य ट्रैक आधारभूत संरचना को मजबूत करना, रेल परिचालन की संरक्षा और दक्षता बढ़ाना तथा यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय रेल सेवा सुनिश्चित करना है।
