नई दिल्ली, 17 अगस्त। वाय के न्यूज। नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के दीक्षांत समारोह को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने नालसर के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण कभी स्वीकार ही नहीं किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे में समारोह में उनके शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता।
यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बीच आया है, जिसकी शुरुआत नालसर के छात्रों के एक वर्ग द्वारा सीजेआई को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताने से हुई थी। बाद में मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) तक पहुंच गया और बीसीआई की कार्रवाई के बाद विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
नालसर ने कुछ दिन पहले यह पुष्टि की थी कि विश्वविद्यालय ने अपनी परंपरा के अनुसार अगस्त के अंत या सितंबर में प्रस्तावित दीक्षांत समारोह के लिए सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। हालांकि, अब सीजेआई ने कहा है कि उनकी ओर से निमंत्रण स्वीकार किए जाने की बात सही नहीं है।
छात्रों के विरोध से बढ़ा विवाद
नालसर के 450 से अधिक छात्रों ने सीजेआई को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रतिनिधित्व दिया था। छात्रों की आपत्ति सीजेआई की कुछ न्यायिक टिप्पणियों और छात्र प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में उनके रुख को लेकर थी।
इसके बाद बीसीआई ने नालसर के 2026 में स्नातक होने वाले छात्रों के राज्य बार काउंसिल में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया था। कुछ ही घंटों बाद बीसीआई ने यह फैसला वापस ले लिया और स्पष्ट किया कि 2026 बैच के छात्रों को नामांकन से वंचित नहीं किया जाएगा। हालांकि, उसने घटनाक्रम को लेकर विश्वविद्यालय से रिपोर्ट मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट में बीसीआई को फटकार
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीसीआई की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है और बीसीआई को इस विवाद में हस्तक्षेप करने का अधिकार किस आधार पर मिला, यह स्पष्ट करना होगा। अदालत ने नालसर के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ बीसीआई या किसी राज्य बार काउंसिल की ओर से दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश भी दिया।
इस घटनाक्रम में एक असामान्य स्थिति यह भी बनी कि जिस सीजेआई के निमंत्रण को लेकर विवाद शुरू हुआ, उन्हीं की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने बीसीआई की कार्रवाई को चुनौती दी गई। सीजेआई ने सुनवाई के दौरान छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन किया था।
अब सीजेआई का बयान सबसे अहम
ताजा घटनाक्रम में सीजेआई सूर्यकांत के बयान ने मूल विवाद के एक महत्वपूर्ण तथ्य को स्पष्ट कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना ज्यादा सही होगा कि “सीजेआई ने निमंत्रण ठुकरा दिया” के बजाय उन्होंने कहा है कि “उन्होंने निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था।”
इस बीच विवाद का असर दूसरे विधि विश्वविद्यालयों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है। बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी नालसर प्रकरण के संदर्भ में सीजेआई सूर्यकांत और बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई है।
इस तरह नालसर का मामला अब केवल एक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के चयन का विवाद नहीं रह गया है। यह छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और बीसीआई की भूमिका को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन गया है।
