3.5 लाख पांडुलिपियां भी उपलब्ध
नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026 (वाय के न्यूज) । भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर अब तेजी से डिजिटल रूप में आम लोगों तक पहुंच रही है। संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि देश के प्रमुख संग्रहालयों की 3,75,707 कलाकृतियां ऑनलाइन उपलब्ध करा दी गई हैं। वहीं, ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर 3.5 लाख से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां भी देखी जा सकती हैं।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि संग्रहालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसके लिए सी-डैक, पुणे के सहयोग से विकसित ‘जतन’ सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि ‘म्यूजियम्स ऑफ इंडिया’ पोर्टल पर आठ राष्ट्रीय संग्रहालयों, दो एएसआई संग्रहालयों और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संग्रहालय, पुणे की डिजिटल सामग्री उपलब्ध है। 15 जुलाई 2026 तक कुल 4,88,983 कलाकृतियों में से 3,75,707 (करीब 77%) का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार भी बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड डिजिटाइज कर रहा है। 21 जुलाई 2026 तक 17.67 करोड़ पृष्ठों की डिजिटल प्रतियां तैयार की जा चुकी हैं। इन दस्तावेजों को ‘अभिलेख पटल’ पोर्टल पर शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसे देश-दुनिया के लोगों के लिए आसानी से सुलभ बनाना है।
बॉक्स : घर बैठे क्या देख सकते हैं?
- 3.75 लाख से अधिक संग्रहालय कलाकृतियां
- 3.5 लाख से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां
- 17.67 करोड़ पृष्ठों के डिजिटाइज अभिलेख
- राष्ट्रीय संग्रहालय, भारतीय संग्रहालय, सालार जंग संग्रहालय, विक्टोरिया मेमोरियल समेत कई प्रमुख संग्रहालयों का डिजिटल संग्रह
