नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा के तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ लंबित कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी है। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ जारी समन आदेश भी निरस्त कर दिए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया। सीबीआई ने जांच के बाद कहा था कि मामले में अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में क्या कहा गया
सीबीआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों, रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला, जिससे डॉ. मनमोहन सिंह या अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, पद के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार का मामला बनता हो।
जांच एजेंसी के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। इसके बाद सीबीआई ने मामले को बंद करने की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की थी।
क्या था मामला
यह मामला ओडिशा के तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा है। आरोप था कि कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और कुछ संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
वर्ष 2015 में विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में डॉ. मनमोहन सिंह सहित अन्य लोगों को समन जारी किए थे। इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद मामले की कार्यवाही पर रोक लगी हुई थी।
सीबीआई जांच के बाद बंद हुआ मामला
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सर्वोच्च न्यायालय ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी तथा समन आदेश निरस्त कर दिए।
इस आदेश के साथ तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का औपचारिक समापन हो गया।
