नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का बढ़ता जलस्तर आने वाले समय में भारत के तटीय शहरों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों के साथ भारत के कोलकाता और मुंबई तथा बांग्लादेश की राजधानी ढाका में रहने वाले बड़ी संख्या में लोगों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर से इन क्षेत्रों में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के विस्थापित होने का खतरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे गंभीर स्थिति उन निचले इलाकों में बन सकती है जहां समुद्र का पानी बढ़ने के कारण लोगों के घर और बस्तियां स्थायी रूप से जलमग्न होने का जोखिम है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि यह स्थिति किस निश्चित समय-सीमा में सामने आ सकती है। इसलिए 1.4 करोड़ लोगों के संभावित विस्थापन को किसी निश्चित वर्ष से जोड़कर नहीं देखा गया है।
2024 में जलस्तर बढ़ने की रिकॉर्ड रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक समुद्र स्तर में वार्षिक वृद्धि रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान समुद्र के जलस्तर में सालाना वृद्धि लगभग 6 मिलीमीटर दर्ज की गई।
संयुक्त राष्ट्र ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर को केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि मानव जीवन और समाज के कई क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला संकट बताया है। इसका असर स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, मानवाधिकारों और सांस्कृतिक विरासत तक पहुंच सकता है।
दक्षिण एशिया के डेल्टा क्षेत्र सबसे संवेदनशील
रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों को विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है। इन क्षेत्रों में बड़ी आबादी समुद्र और नदियों के आसपास बसे इलाकों में रहती है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने के साथ तटीय बाढ़, भूमि के जलमग्न होने और लोगों के विस्थापन का खतरा बढ़ सकता है।
न्यूयॉर्क में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त राष्ट्र की असिस्टेंट सेक्रेटरी-जनरल अमीना जे. मोहम्मद ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर को एक व्यवस्थागत चुनौती के रूप में देखने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, इसका प्रभाव स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ मानवाधिकारों और संस्कृति पर भी पड़ सकता है।
रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया के कई तटीय शहर समुद्र के बढ़ते जलस्तर, तटीय कटाव और अत्यधिक मौसम की घटनाओं के जोखिम से जूझ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए तटीय क्षेत्रों में अनुकूलन और आपदा-रोधी उपायों को मजबूत करना जरूरी है।
