झारखंड से पंजाब और महाराष्ट्र तक: पेपर लीक पर सियासत तेज, अलग-अलग राज्यों में सरकार और विपक्ष आमने-सामने

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कहीं सीबीआई जांच की मांग, कहीं भर्ती प्रक्रिया पर सवाल, तो कहीं सरकार ने आरोपों को किया खारिज

नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 संसद से पारित होने के साथ ही देशभर में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, दिल्ली और तेलंगाना सहित कई राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सरकारों को घेर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां जिस दल की सरकार है, वहां विपक्ष पेपर लीक को बड़ा मुद्दा बना रहा है।

झारखंड: भाजपा सांसदों का संसद परिसर में प्रदर्शन

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर शुक्रवार को भाजपा सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित कई सांसद शामिल हुए।

भाजपा का आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में जेपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार ने सीबीआई जांच से बचने के लिए केवल सीआईडी जांच का आदेश दिया है।

पंजाब: भाजपा ने AAP सरकार को घेरा

एक दिन पहले पंजाब में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। भाजपा ने राज्य सरकार पर भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय नहीं करने का आरोप लगाया।

हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।

महाराष्ट्र: एमपीएससी भर्ती परीक्षा पर विवाद

महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र व्हाट्सएप पर प्रसारित हुआ और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

हालांकि एमपीएससी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई और पेपर लीक के आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं मिला है।

बिहार: नीट पेपर लीक बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

बिहार में नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद), वाम दलों और छात्र संगठनों ने कई चरणों में प्रदर्शन किए। विपक्ष ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की।

राजस्थान: कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला

राजस्थान में कांग्रेस ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन किए और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

दिल्ली: संसद से जंतर-मंतर तक विरोध

राष्ट्रीय राजधानी में संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने लगातार नीट पेपर लीक और परीक्षा सुधार का मुद्दा उठाया। दूसरी ओर छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

तेलंगाना: सोशल मीडिया पोस्ट पर एफआईआर

तेलंगाना में नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित होने के मामले में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मेटा इंडिया के अधिकारियों और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

नया कानून और राजनीतिक माहौल

इसी बीच संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन अधिनियम, 2026 पारित कर दिया है। नए कानून में पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों के लिए अधिक कठोर दंड, सेवा प्रदाताओं पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना, 8 वर्ष तक प्रतिबंध, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान किए गए हैं।

राजनीतिक तस्वीर

पेपर लीक अब केवल कानून-व्यवस्था या परीक्षा प्रबंधन का विषय नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन चुका है। झारखंड और पंजाब में भाजपा विपक्ष की भूमिका में राज्य सरकारों को घेर रही है, जबकि बिहार, राजस्थान और दिल्ली में कांग्रेस, राजद, वाम दल और अन्य विपक्षी दल केंद्र सरकार को निशाना बना रहे हैं। महाराष्ट्र में विपक्ष भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, जबकि तेलंगाना में यह विवाद सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक पहुंच गया है।

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