माल ढुलाई होगी सस्ती, सड़क और रेल पर घटेगा दबाव
नई दिल्ली, 25 जुलाई, 2026, वाय के न्यूज। देश में माल ढुलाई के लिए अब नदियों और नहरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने बताया है कि देश के 32 राष्ट्रीय जलमार्गों पर नियमित जहाज संचालन शुरू हो चुका है। सरकार का लक्ष्य जलमार्गों को सड़क और रेल का मजबूत विकल्प बनाना है, जिससे माल ढुलाई सस्ती, तेज और पर्यावरण के अनुकूल हो सके।
लोकसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि राष्ट्रीय जलमार्गों पर टर्मिनल, जेट्टी, नौवहन सुविधाएं और डिजिटल व्यवस्था तेजी से विकसित की जा रही हैं।
जलमार्ग क्यों हैं फायदेमंद?
सरकार के अनुसार, एक टन सामान को एक किलोमीटर ले जाने की औसत लागत—
- जलमार्ग: 1.06 रुपये
- रेल: 1.36 रुपये
- सड़क: 2.50 रुपये
यानी जलमार्ग से माल भेजना सड़क की तुलना में आधे से भी कम खर्चीला है।
प्रदूषण भी कम
सरकार का कहना है कि जलमार्गों से माल ढुलाई में ईंधन की खपत कम होती है और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम होता है। इससे वायु और ध्वनि प्रदूषण भी घटता है।
क्या-क्या हो रहा है निर्माण?
देशभर में जलमार्गों पर कई नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं—
- मल्टीमॉडल टर्मिनल
- सामुदायिक जेट्टी
- नदी क्रूज टर्मिनल
- डिजिटल नेविगेशन प्रणाली
- जहाजों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था
- आधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वे
प्रमुख परियोजनाएं
सरकार ने बताया कि गंगा (राष्ट्रीय जलमार्ग-1), ब्रह्मपुत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग-2), बराक (राष्ट्रीय जलमार्ग-16), केरल की पश्चिमी तट नहर, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, गोवा और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में जलमार्ग परियोजनाओं पर काम चल रहा है। गंगा पर वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया के मल्टीमॉडल टर्मिनल पहले से चालू हैं, जबकि कई नए टर्मिनल, जेट्टी और नदी क्रूज सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
सरकार का लक्ष्य
सरकार का मानना है कि जलमार्गों के विस्तार से परिवहन लागत घटेगी, उद्योगों और किसानों को लाभ मिलेगा, सड़क और रेल पर दबाव कम होगा, रोजगार बढ़ेंगे और देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक मजबूत बनेगी।
