छत्तीसगढ़ के जलाशयों में तैरेंगे सौर बिजलीघर

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30 प्रमुख जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की तैयारी

6 गीगावाट तक बिजली उत्पादन की संभावना

रायपुर, 26 जुलाई, 2026, वाय के न्यूज। बढ़ती बिजली मांग को स्वच्छ ऊर्जा से पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ में प्रमुख जलाशयों पर बड़े पैमाने पर फ्लोटिंग (तैरते हुए) सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। ऊर्जा एवं पर्यावरण क्षेत्र की संस्था आईफॉरेस्ट (iFOREST) की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के प्रमुख जलाशयों में करीब 6 गीगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर संयंत्र विकसित किए जा सकते हैं।

रिपोर्ट में राज्य के 342 जलाशयों का अध्ययन किया गया है। इनमें से 30 बड़े जलाशयों को फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के लिए सर्वाधिक उपयुक्त बताया गया है। इनमें हसदेव बैराज सबसे अधिक संभावनाओं वाला जलाशय है, जहां लगभग 647 मेगावाट क्षमता विकसित की जा सकती है।

रिपोर्ट में राजनांदगांव जिले का भी विशेष उल्लेख किया गया है। यहां मौजूद छोटे और मध्यम आकार के जलाशयों को क्लस्टर मॉडल के तहत विकसित कर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं स्थापित करने की संभावना जताई गई है। इससे एक ही क्षेत्र के कई जलाशयों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा।

राज्य में इस दिशा में शुरुआती परियोजनाओं पर भी काम शुरू हो चुका है। एनटीपीसी सिपत में 26 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना पर कार्य आगे बढ़ रहा है। वहीं भिलाई के मरौदा रिजर्वायर-2 में 20 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना की निविदा प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ के जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर संयंत्र स्थापित होने से राज्य की ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी और औद्योगिक क्षेत्रों की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। साथ ही कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


जानिए, फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के फायदे

▪️ जल संरक्षण: जलाशयों की सतह पर सौर पैनल लगने से पानी का वाष्पीकरण कम होता है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बचत होती है।

▪️ भूमि की बचत: सौर संयंत्रों के लिए अतिरिक्त कृषि भूमि या वन क्षेत्र का अधिग्रहण नहीं करना पड़ता।

▪️ बेहतर दक्षता: पानी की ठंडक के कारण सौर पैनल अपेक्षाकृत अधिक कुशलता से बिजली उत्पादन करते हैं।

▪️ छत्तीसगढ़ में बड़ी संभावना: राज्य के 342 जलाशयों के अध्ययन में 30 बड़े जलाशय फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के लिए उपयुक्त पाए गए हैं।

▪️ औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ: भिलाई, कोरबा, रायगढ़ और राजनांदगांव जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की बढ़ती बिजली मांग को स्थानीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा से पूरा करने में मदद मिलेगी।

▪️ राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान: यह पहल भारत के वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक होगी।

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