छत्तीसगढ़ की सांसों में बसी रही है हॉकी, मेजर ध्यानचंद ने पहचानी थी इसकी धड़कन

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राष्ट्रीय खेल दिवस पर विशेष

आलेख -कमलेश गोगिया


छत्तीसगढ़ की मिट्टी में हॉकी केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा है, जिसकी धड़कन पीढ़ियों से यहां के मैदानों में सुनाई देती रही है। गांवों की पगडंडियों से लेकर शहरों के खेल मैदानों तक, हॉकी की स्टिक और गेंद ने इस प्रदेश की खेल संस्कृति को एक अलग पहचान दी है। मेहनत, जुनून और संघर्ष से भरी इस धरती ने समय-समय पर ऐसी हॉकी प्रतिभाओं को जन्म दिया, जिन्होंने अपने खेल से प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन किया।
छत्तीसगढ़ की हॉकी परंपरा की समृद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने राजनांदगांव को ‘हॉकी की नर्सरी’ कहा था। उनकी पारखी नजर ने इस धरती में छिपी खेल प्रतिभा को बहुत पहले पहचान लिया था। उन्हें पूरा विश्वास था कि छत्तीसगढ़ से आने वाले दिनों में प्रतिभावान हॉकी खिलाड़ी निकलेंगे और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे। समय ने उनके इस विश्वास को सच साबित किया।


अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य के गठन तक, हॉकी की समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अनेक खिलाड़ियों और खेल-शख्सियतों का अविस्मरणीय योगदान रहा है। लेस्ली क्लॉडियस, एरमन आर. बेस्टियन, विन्सेंट लकड़ा, नीता डुमरे, सबा अंजुम, रेणुका यादव और मृणाल चौबे जैसे खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों ने अपने शानदार प्रदर्शन और समर्पण से इस विरासत को नई ऊंचाइयां दीं।
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का राजनांदगांव को ‘हॉकी की नर्सरी’ का संबोधन केवल राजनांदगांव के लिए गौरव की बात नहीं, बल्कि उस धरती की खेल प्रतिभा, हॉकी के प्रति जुनून और वर्षों पुरानी समृद्ध परंपरा का प्रमाण है। इस ‘हॉकी की नर्सरी’ ने एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को जन्म दिया, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शानदार प्रदर्शन से देश और प्रदेश का मान बढ़ाया।
मेजर ध्यानचंद राजनांदगांव और रायपुर में आयोजित की जाने वाली हॉकी की ऐतिहासिक खेल स्पर्धाओं व यहां के खिलाड़ियों के खेल प्रेम से खासा प्रभावित थे। राजनांदगांव के खेल इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण वर्ष 1967-68 भी रहा है जब महंत सर्वेश्वर दास स्मृति अखिल भारतीय चैलेंज कप हॉकी प्रतियोगिता का रजत जयंती वर्ष मनाया जा रहा था। यह प्रतियोगिता राजनांदगांव और राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक है जिसकी शुरुआत आजादी के पूर्व 1941 में हुई थी। वर्ष 1991-92 में स्वर्ण जयंति के अवसर पर निकाली गई स्मारिका में उल्लेख मिलता है- ’तब इस प्रतियोगिता ने 25 गौरवशाली वर्ष पूरा कर लिया था। वायुयान से खिलाड़ियों पर फूलों की वर्षा की गई थी। इस समय की दूसरी उल्लेखनीय विशिष्टता रही हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का उल्लासपूर्ण सम्मान किया जाना। 2 जनवरी 1971 को विश्व के श्रेष्ठतम हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का सम्मान किया गया था। इस अवधि में ओलंपियन रणधीर सिंह का भी सम्मान किया जाना विशेष उपलब्धि थी।’ वहीं एथलेटिक क्लब द्वारा राजधानी में आयोजित की जाने वाली नेहरू स्मारक अखिल भारतीय स्वर्ण कप हॉकी प्रतियोगिता में सन 1972 में भी ध्यानचंद रायपुर आए थे। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को छत्तीसगढ़ की धरती और यहां की हॉकी प्रतिभाओं पर पूरा भरोसा था। उन्हें विश्वास था कि इस प्रदेश की मिट्टी से आने वाले समय में अनेक प्रतिभावान हॉकी खिलाड़ी निकलेंगे और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे। यही विश्वास उनके द्वारा राजनांदगांव को ‘हॉकी की नर्सरी’ कहे जाने में भी झलकता है। उनका यह आकलन समय के साथ सच साबित हुआ और छत्तीसगढ़ की धरती ने एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ियों को जन्म दिया। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां और इन प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं की गौरवशाली परंपरा मिलकर छत्तीसगढ़ की हॉकी यात्रा की ऐसी कहानी रचती हैं, जिसमें संघर्ष, जुनून, प्रतिभा और उपलब्धियों के अनेक अध्याय दर्ज हैं।
वर्तमान में रायपुर और राजनांदगांव के साथ-साथ जशपुर में भी हॉकी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुनियादी अधोसंरचनाएं विकसित की गई हैं। इन आधुनिक खेल सुविधाओं ने प्रदेश में हॉकी के विकास को नई गति देने के साथ-साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, अभ्यास और प्रतिस्पर्धा के अवसर उपलब्ध कराए हैं। यही मजबूत खेल अधोसंरचना छत्तीसगढ़ में हॉकी की समृद्ध परंपरा को भविष्य की नई प्रतिभाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


छत्तीसगढ़ की समृद्ध हॉकी परंपरा अब एक नए पड़ाव की ओर बढ़ रही है। प्रदेश में देश की पहली राज्य स्तरीय ‘छत्तीसगढ़ हॉकी लीग’ (CHL) की शुरुआत होने जा रही है। 21 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में आयोजित होने वाली यह प्रतियोगिता प्रदेश की हॉकी प्रतिभाओं को एक नया मंच और नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। लीग के माध्यम से स्थानीय खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा और उन्हें अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर साबित करने का अवसर प्राप्त होगा।
यह पहल छत्तीसगढ़ में हॉकी के सुनहरे अतीत को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। उम्मीद है कि इस लीग से प्रदेश की नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और छत्तीसगढ़ की हॉकी एक बार फिर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगी।

कमलेश गोगिया छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार हैं

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