बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- बीजेपी पंजीकृत राष्ट्रीय दल होने के कारण पहचान योग्य संस्था; टिप्पणी का वास्तविक आशय ट्रायल में तय होगा
मुंबई, 8 सितंबर, वाय के न्यूज़। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस नितिन बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया।
राहुल गांधी ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन और उसके बाद की आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई थी कि कथित टिप्पणी में भारतीय जनता पार्टी या उसके सदस्यों का नाम नहीं लिया गया था। इसलिए कोई स्पष्ट, पहचान योग्य या निश्चित वर्ग ऐसा नहीं है, जिसके आधार पर शिकायतकर्ता को मानहानि की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार मिले।
बीजेपी को पहचान योग्य संस्था माना
हाईकोर्ट ने इस दलील को शुरुआती स्तर पर स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि बीजेपी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए उसे पहचान योग्य एवं निश्चित संस्था माना जा सकता है।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता का दावा है कि वह करीब दो दशक से बीजेपी का सक्रिय सदस्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को, जो बीजेपी के सदस्य हैं, ‘कमांडर-इन-थीफ’ कहे जाने वाली टिप्पणी को पहली नजर में केवल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित नहीं माना जा सकता।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित टिप्पणी का वास्तविक अर्थ क्या था और उसका पार्टी के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, इन सवालों का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान किया जाएगा।
बीजेपी कार्यकर्ता ने दर्ज कराई शिकायत
मामला बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल की शिकायत पर शुरू हुआ था। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दायर करते हुए आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की टिप्पणियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ सत्तारूढ़ पार्टी और उसके सदस्यों को भी निशाना बनाती हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मोदी को ‘चोरों का सरदार’ कहे जाने का अर्थ बीजेपी के सदस्यों को भी ‘चोर’ के रूप में चित्रित करना है। मजिस्ट्रेट ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था।
राहुल गांधी की ओर से क्या तर्क दिया गया?
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पासबोला ने दलील दी कि कथित ट्वीट में बीजेपी या किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया गया था। उनके मुताबिक किसी निश्चित या पहचान योग्य समूह को निशाना नहीं बनाया गया, इसलिए शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार नहीं था।
महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल डॉ. मिलिंद साठे ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस स्तर पर अदालत को यह देखना है कि मानहानि के अपराध के आवश्यक तत्व प्रथमदृष्टया मौजूद हैं या नहीं और क्या टिप्पणी किसी निश्चित एवं पहचान योग्य समूह से संबंधित हो सकती है।
शशि थरूर मामले का भी हवाला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के शशि थरूर से जुड़े मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। उस फैसले में राजनीतिक दल को उसके पंजीकरण के आधार पर पहचान योग्य और निश्चित संस्था माना गया था।
इसी आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन में ऐसी कोई कानूनी खामी नहीं दिखती, जिसके आधार पर पूरी कार्यवाही रद्द कर दी जाए।
अब ट्रायल में तय होंगे विवादित सवाल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही जारी रह सकेगी। हालांकि अदालत ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि राहुल गांधी की टिप्पणी वास्तव में आपराधिक मानहानि है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि टिप्पणी का वास्तविक आशय, उसका दायरा और पार्टी के सदस्यों पर उसके कथित प्रभाव जैसे सवाल ट्रायल के दौरान तय किए जाएंगे।
