चिकन नेक पर गृहमंत्री का त्रिकोणीय सुरक्षा कवच तैयार

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सिलीगुड़ी, 22 अगस्त। वाय के न्यूज। भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाले बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि इस रणनीतिक गलियारे की सुरक्षा के लिए त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड तैयार कर दिया गया है। इसके तहत पश्चिम बंगाल के चोपड़ा, बिहार के किशनगंज और असम के धुबरी से सुरक्षा बलों की मौजूदगी, निगरानी और क्षेत्र में प्रभुत्व बढ़ाया गया है।

अमित शाह ने यह जानकारी 21 अगस्त को सिलीगुड़ी में सशस्त्र सीमा बल (SSB) से जुड़े सुरक्षा ढांचे के कार्यक्रम में दी। उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह कॉरिडोर देश के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है और नेपाल, भूटान तथा बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित है।

तीन ठिकानों से बढ़ाई गई सुरक्षा मौजूदगी

गृह मंत्री के अनुसार चोपड़ा, किशनगंज और धुबरी—इन तीन ठिकानों से सिलीगुड़ी कॉरिडोर में सुरक्षा बलों की मौजूदगी और निगरानी बढ़ाई गई है। इसी व्यवस्था को त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड के रूप में विकसित किया गया है।

इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि कॉरिडोर की भौगोलिक स्थिति इसे देश के सबसे संवेदनशील रणनीतिक संपर्क मार्गों में शामिल करती है। पूर्वोत्तर के साथ सड़क और रेल संपर्क के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है।

सीमा सुरक्षा के साथ बुनियादी ढांचे पर भी जोर

अमित शाह ने सिलीगुड़ी दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा से जुड़े ढांचे और प्रतिष्ठानों के लिए 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है। उनके अनुसार शेष 29 एकड़ जमीन की व्यवस्था भी की जा रही है।

गृह मंत्री ने सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मामले में राज्य सरकार के सहयोग का उल्लेख किया।

नेपाल-भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के बीच अहम स्थिति

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत इसकी भौगोलिक स्थिति से जुड़ी है। इसके आसपास नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं। यही क्षेत्र भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाला प्रमुख जमीनी संपर्क मार्ग है।

इसी वजह से यहां सीमा निगरानी, सुरक्षा बलों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

गोरखा मुद्दे पर भी अमित शाह की अहम बैठक

सिलीगुड़ी दौरे के अंतिम दिन 22 अगस्त को अमित शाह ने सुकना में गोरखा नेताओं और पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक की। इसमें दार्जिलिंग हिल्स, तराई और दुआर्स से जुड़े राजनीतिक एवं पहचान संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक के बाद केंद्र ने वार्ताकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्णय लिया। समिति का काम संविधान के दायरे में गोरखा समुदाय के लिए प्रस्तावित स्थायी राजनीतिक समाधान से जुड़े समझौते और उसकी प्रक्रिया का प्रारूप तैयार करना है।

सुरक्षा और राजनीतिक संवाद—दोनों मोर्चों पर सक्रियता

अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे में एक साथ दो महत्वपूर्ण पहल सामने आईं। एक ओर पूर्वोत्तर के प्रवेश-द्वार माने जाने वाले ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा के लिए तीन ठिकानों पर आधारित त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड की जानकारी दी गई, वहीं दूसरी ओर दार्जिलिंग और आसपास के गोरखा बहुल क्षेत्रों के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक मुद्दों पर संवैधानिक समाधान की दिशा में समिति बनाने का निर्णय हुआ।

यानी सिलीगुड़ी में सुरक्षा का नया ग्रिड और गोरखा मुद्दे पर नई बातचीत—दोनों संकेत उत्तर बंगाल की रणनीतिक और राजनीतिक अहमियत को एक साथ सामने लाते हैं।

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