खून की जांच से अल्जाइमर की शुरुआती पहचान की नई उम्मीद

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शोध में मिला संभावित बायोमार्कर

वॉशिंगटन, 20 जुलाई 2026 (वाय के न्यूज डेस्क)। अल्जाइमर रोग की शुरुआती पहचान के लिए खून की जांच पर आधारित एक नई संभावना सामने आई है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया है कि रक्त में मौजूद सर्कुलर आरएनए (circRNAs) इस बीमारी के संभावित बायोमार्कर के रूप में काम कर सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे भविष्य में अल्जाइमर की पहचान और उपचार की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

क्या है अल्जाइमर?


अल्जाइमर मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें समय के साथ व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने, निर्णय लेने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। यह डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का सबसे सामान्य कारण माना जाता है। फिलहाल इसका पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर पहचान, उचित उपचार और देखभाल से इसके लक्षणों की प्रगति को कुछ हद तक धीमा किया जा सकता है।

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature Medicine में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वर्तमान में उपयोग किए जा रहे कुछ बायोमार्कर, विशेषकर एमिलॉयड प्लाक हटाने वाली नई दवाओं से उपचार करा रहे मरीजों में, हमेशा बीमारी की वास्तविक स्थिति नहीं दर्शाते। ऐसे मामलों में pTau परीक्षण नकारात्मक आ सकता है, जबकि मरीज अल्जाइमर से प्रभावित हो सकता है।

अध्ययन के संबंधित लेखक डॉ. कार्लोस क्रुचागा ने कहा कि circRNAs रोग की समग्र जैविक स्थिति को समझने के लिए अतिरिक्त और महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। इससे भविष्य में रोग की शुरुआती पहचान के साथ उपचार के प्रभाव का आकलन भी बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।

शोधकर्ता अपने औद्योगिक साझेदारों के साथ मिलकर circRNA आधारित रक्त जांच को क्लिनिकल उपयोग के लिए विकसित करने पर काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य ऐसी जांच विकसित करना है, जिससे अल्जाइमर की पहचान अपेक्षाकृत सरल रक्त परीक्षण के जरिए की जा सके।

इस शोध को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग (NIA) और नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) का सहयोग प्राप्त हुआ है।

हालांकि, शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि यह रक्त-आधारित जांच अभी शोध और विकास के चरण में है। इसे नियमित चिकित्सा पद्धति का हिस्सा बनने से पहले व्यापक क्लिनिकल परीक्षण, स्वतंत्र सत्यापन और नियामकीय स्वीकृतियों से गुजरना होगा।

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