कोयला गैसीकरण की दौड़ में छत्तीसगढ़ भी, NTPC का तलाईपल्ली SNG प्रोजेक्ट शामिल

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37,500 करोड़ की केंद्रीय योजना में सात आवेदन, अदाणी की तीन यूरिया परियोजनाएं; NTPC ने सिंथेटिक गैस के लिए प्रस्ताव दिया

नई दिल्ली, 8 सितंबर, वाय के न्यूज़। देश में कोयले से गैस और उच्च मूल्य वाले उत्पाद तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना में छत्तीसगढ़ का तलाईपल्ली क्षेत्र भी महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर रहा है। केंद्र की ₹37,500 करोड़ की सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना के पहले चरण में सात आवेदन मिले हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NTPC का सिंथेटिक नेचुरल गैस (SNG) परियोजना का प्रस्ताव शामिल है। NTPC की प्रस्तावित परियोजना छत्तीसगढ़ के तलाईपल्ली क्षेत्र से जुड़ी है।

कोयला मंत्रालय के अनुसार पहले चरण में अदाणी एंटरप्राइजेज ने तीन अलग-अलग यूरिया परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा गैलेंट इस्पात ने प्रत्यक्ष रूप से कम किए गए लौह (DRI) और सिंथेटिक गैस, NTPC ने SNG, श्याम सेल एंड पावर ने सिंथेटिक गैस और तालचर फर्टिलाइजर्स ने यूरिया उत्पादन के लिए आवेदन किया है।

तलाईपल्ली में 5 लाख टन सालाना SNG का प्रस्ताव

NTPC ने जनवरी 2026 में छत्तीसगढ़ के तलाईपल्ली में कोयले से SNG बनाने की परियोजना की योजना सार्वजनिक की थी। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता करीब 5 लाख टन SNG सालाना बताई गई है। परियोजना करीब 150 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है और इसमें NTPC की कैप्टिव खदानों से करीब 25 लाख टन उच्च राख वाले भारतीय कोयले की सालाना खपत का अनुमान है। परियोजना में कोयला लाभकारीकरण, गैसीकरण, वाटर-गैस शिफ्ट और मेथेनेशन जैसी प्रक्रियाएं शामिल होंगी।

NTPC ने इस परियोजना के लिए तकनीकी लाइसेंस से संबंधित प्रक्रिया भी शुरू की है। कंपनी के टेंडर दस्तावेजों में NTPC Talai Palli, Chhattisgarh में कोयला गैसीकरण आधारित SNG परियोजना के मेथेनेशन यूनिट के लिए टेक्नोलॉजी लाइसेंसर नियुक्त करने का उल्लेख है।

तालचर में कोयले से यूरिया

सात आवेदनों में शामिल तालचर फर्टिलाइजर्स की परियोजना भी कोयला गैसीकरण पर आधारित है। कंपनी के अनुसार प्रस्तावित परिसर में 2,200 टन प्रतिदिन क्षमता का अमोनिया संयंत्र और 3,850 टन प्रतिदिन क्षमता का यूरिया संयंत्र शामिल है। इससे सालाना करीब 12.7 लाख टन नीम-कोटेड प्रिल्ड यूरिया उत्पादन का लक्ष्य है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹13,277 करोड़ है।

परियोजना में तालचर की खदानों से करीब 25 लाख टन कोयला सालाना इस्तेमाल किए जाने की योजना है। कंपनी के अनुसार संयंत्र का यांत्रिक निर्माण जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सात प्रस्ताव, अलग-अलग औद्योगिक इस्तेमाल

पहले चरण में मिले सात आवेदनों में तीन अलग-अलग तरह के अंतिम उत्पाद सामने आए हैं। अदाणी एंटरप्राइजेज और तालचर फर्टिलाइजर्स यूरिया, NTPC SNG, जबकि गैलेंट इस्पात DRI और सिंथेटिक गैस तथा श्याम सेल एंड पावर सिंथेटिक गैस के क्षेत्र में प्रस्ताव लेकर आए हैं। मंत्रालय के अनुसार सभी आवेदनों का अब योजना के दिशा-निर्देशों और RFP के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।

दूसरे चरण के लिए आवेदन आज से

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को ₹37,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य घरेलू कोयले और लिग्नाइट को सिंथेटिक गैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन जैसे उत्पादों में बदलने वाली परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।

सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसमें नई योजना के तहत 75 मिलियन टन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। मंत्रालय के अनुसार योजना से ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक के निवेश को गति मिलने का अनुमान है।

योजना का दूसरा चरण 8 सितंबर 2026 से खुल गया है। आवेदन की अगली विंडो दो-दो महीने के अंतराल पर खुलने की व्यवस्था है।

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