कथा सम्राट प्रेमचंद की रचनाओं पर हुई विचार गोष्ठी

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राजनांदगांव में प्रगतिशील लेखक संघ का आयोजन


राजनांदगांव 5अगस्त /छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालय राजनांदगांव में कथा सम्राट प्रेमचंद जी की 146 वीं जयंती के उपलक्ष्य में उनकी रचनाओं पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । प्रगतिशील लेखक संघ के इस आयोजन में साकेत साहित्य परिषद, सुरगी के अध्यक्ष
ओमप्रकाश साहू अंकुर मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता कुबेर सिंह साहू वरिष्ठ साहित्यकार एवं संरक्षक साकेत साहित्य परिषद ने की। राजनांदगांव के नंदई स्थित प्रकाश भवन में विगत दो अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ शंकरमुनि रॉय विभागाध्यक्ष, दिग्विजय कालेज राजनांदगांव रहे। मुख्य अतिथि ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रेमचंद जी ने अपनी कहानियों के माध्यम से हिंदी साहित्य में एक नई क्रांति ला दी। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पहले उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखते थे। उनकी कहानी *सोज़ ए वतन* में देशप्रेम का जीवंत उदाहरण देखने को मिलता है जिसे अंग्रेजी शासन ने जब्त कर लिया था। बाद हिंदी में प्रेमचंद के नाम से कई कहानियों और उपन्यासों का सृजन किया।
डॉ शंकरमुनि रॉय ने अपने वक्तव्य में कहा कि जब तक कोई रचनाकार प्रगतिशील नहीं रहेगा वह तब तक आगे नहीं बढ़ सकेगा। प्रेमचंद की रचनाओं में आदर्श और यथार्थवाद देखने को मिलता है। उन्होंने गोदान ईदगाह और पंच परमेश्वर कहानियां पर चर्चा करते हुए अपनी बात रखी पंचपरमेश्वर के बूढ़ी खाला और अलगू चौधरी के संवाद क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात नहीं करोगे पर सारगर्भित चर्चा करते हुए कहा कि प्रेमचंद निर्विवाद रचनाकार है उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
डॉ प्रवीण साहू प्राध्यापक, हिंदी विभाग, दिग्विजय कालेज राजनांदगांव जी ने कहा कि प्रेमचंद की चर्चा आज के समय में बहुत आवश्यक है प्रेमचंद एक साहित्यकार के रूप में नहीं बल्कि चिंतक के रूप में भी जाने जाते हैं ।प्रेमचंद अपने आप में साहित्य की एक युग के समान है।
प्रो .थान सिंह वर्मा ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में गांधीवादी विचारधारा के साथ सोवियत रूस के क्रांति से प्रभावित होते हुए समतावादी दृष्टिकोण परिलक्षित होते हैं।अपनी कहानियों एवं उपन्यासों में किसानो के अस्तित्व को रेखांकित किए हैं ।उनकी रचनाएं कर्मभूमि, सोजे वतन में देश के लिए प्रेम झलकता है ।प्रेमचंद समतावादी समाज की कल्पना अपनी रचनाओं के माध्यम से करते हैं । उन्होंने अपनी कहानियों में सर्वहारा वर्ग के संघर्षों का वर्णन किया हैं। अपने अध्ययक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू ने * शतरंज के खिलाड़ी* सहित प्रेमचंद की कुछ कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कथा सम्राट ने समाज में व्याप्त असमानता को अपनी कहानियों के माध्यम से बखूबी चित्रित किया है।
वरिष्ठ कवि रोशन साहू ने कहा प्रेमचंद अपनी रचनाओं में पात्र के चरित्र को जीते हैं ।साहित्य जगत में प्रेमचंद नायक की तरह हैं।
पवन यादव पहुना उपाध्यक्ष, साकेत साहित्य परिषद सुरगी ने कहा कि प्रेमचंद ने 300 से अधिक कहानियां लिखी हैं । उनकी कहानियों में ग्रामीण पृष्ठभूमि, किसान शोषित वर्गों का मार्मिक चित्रण देखने को मिलता है।
प्रगतिशील लेखक संघ राजनांदगांव के सचिव पोषण लाल वर्मा ने कहा प्रेमचंद की रचनाएं आज भी प्रासंगिक है उनकी कहानी सवा सेर गेहूं ,कफन,सद्गति और ठाकुर का कुआं में समाज के यथार्थ का मार्मिक चित्रण देखने को मिलता है ।उनकी रचनाएं समाज के विसंगतियों को उजागर करती है।
कार्तिक राम साहू व्याख्याता ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेमचंद के “आभूषण “कहानी के माध्यम से एक स्त्री के आभूषण प्रेम को चित्रित किया है। इस कहानी में प्रेमचंद ने संदेश दिया है कि एक स्त्री का सच्चा आभूषण सोने,चांदी का गहना नहीं अपितु उनका चरित्र एवं संस्कार ही असली आभूषण है।
वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश श्रीवास्तव ने प्रेमचंद को यथार्थवादी प्रगतिशील विचारधारा का जनक बताया।
प्रगतिशील लेखक संघ राजनांदगांव के अध्यक्ष प्रभात तिवारी ने कफन एवं अन्य कहानियों पर विस्तृत चर्चा करते हुए अपनी बात रखी।
कार्यक्रम में आनंद सार्वा ,संतोष सिंह, विनायक राव घरडे ,अलख राम यादव, फकीर प्रसाद साहू फक्कड़,सेवंत देशमुख ने समसामयिक विषयों पर रचना पाठ कर जहां विभिन्न विसंगतियों पर करारा प्रहार किए वहीं सीखपरक रचनाएं भी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का संचालन हरेंद्र कंवर व्याख्याता ने एवं आभार प्रदर्शन पोषण लाल वर्मा ने किया।

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