प्राकृतिक आवास से हजारों किलोमीटर दूर मिले पांचों युवा ओरंगुटान; अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की आशंका, ओडिशा सरकार ने जांच के संकेत दिए
रायपुर, 9 सितंबर, वाय के न्यूज। ओडिशा के बालासोर जिले के भोगराई इलाके में जंगल से पांच युवा ओरंगुटान मिलने की घटना ने वन्यजीव सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय तस्करी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। भारत के जंगलों में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाने वाले इन पांच जानवरों के बिचित्रपुर-रणकोठा क्षेत्र में मिलने के बाद वन विभाग ने उन्हें सुरक्षित बरामद कर लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये ओरंगुटान आखिर बालासोर के जंगल तक पहुंचे कैसे?
ओडिशा के स्थानीय पोर्टलों ओडिशा संबाद और प्रमेय की 8 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, पांचों ओरंगुटान बालासोर के रणकोठा रिजर्व फॉरेस्ट में बदापाही के आसपास पाए गए। उदयपुर वन क्षेत्र की टीम ने इन्हें देखा और बाद में विशेष टीम गठित कर इन्हें सुरक्षित निकाला। दोनों रिपोर्टों में इनके स्वास्थ्य परीक्षण और आगे नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखने की तैयारी की जानकारी दी गई है।
एक जंगल, पांच विदेशी वन्यजीव और कई सवाल
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक पांचों की उम्र करीब एक से दो वर्ष बताई गई है। वन विभाग ने उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया। ओरंगुटान भारत के मूल वन्यजीव नहीं हैं। उनका प्राकृतिक आवास दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा क्षेत्र में है। ऐसे में बालासोर के जंगल में एक साथ पांच युवा ओरंगुटान का मिलना सामान्य प्राकृतिक घटना नहीं माना जा रहा है।
घटना की जानकारी फैलने के बाद इलाके में बड़ी संख्या में लोग इन्हें देखने पहुंच गए। इसके बाद वन विभाग ने मौके पर कार्रवाई कर पांचों को अपने संरक्षण में लिया।
तस्करी का शक, लेकिन अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की आशंका है। ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने कहा है कि मामले में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) से जांच कराई जाएगी। मंत्री के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर के किसी नेटवर्क की संलिप्तता की संभावना को भी जांच में देखा जाएगा।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पांचों ओरंगुटान निश्चित रूप से तस्करी के जरिए भारत लाए गए थे। वन विभाग की जांच का मुख्य उद्देश्य इनके मूल स्थान, भारत तक पहुंचने के रास्ते और इन्हें जंगल में छोड़ने वाले व्यक्ति या नेटवर्क का पता लगाना है।
स्थानीय रिपोर्टों में एक अहम अंतर
8 सितंबर की ओड़िया रिपोर्टों में घटना की शुरुआत को लेकर मामूली अंतर भी सामने आया है। ओडिशा संबाद और प्रमेय के अनुसार उदयपुर वन विभाग की टीम ने नियमित गश्त के दौरान रणकोठा क्षेत्र में इन्हें देखा। दूसरी ओर बाद की रिपोर्टों में बालासोर वन विभाग को सूचना मिलने के बाद कार्रवाई और बरामदगी का उल्लेख है।
इसी तरह कुछ राष्ट्रीय रिपोर्टों में स्थान को बिचित्रपुर कैसुआरिना जंगल बताया गया है, जबकि स्थानीय ओड़िया रिपोर्टें रणकोठा रिजर्व फॉरेस्ट और बदापाही का उल्लेख करती हैं। इसलिए उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर घटना का स्थान भोगराई क्षेत्र में बदापाही के आसपास का जंगल बताया जाना अधिक सुरक्षित है।
अब जांच का दायरा बढ़ सकता है
पांचों ओरंगुटान की बरामदगी सिर्फ वन्यजीव संरक्षण का मामला नहीं है। यदि जांच में इनके भारत में अवैध तरीके से लाए जाने की पुष्टि होती है तो मामला अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क तक जा सकता है। यही वजह है कि WCCB की संभावित जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल पांचों ओरंगुटान वन विभाग की निगरानी में हैं और उनके स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। उन्हें नंदनकानन में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है—बोर्नियो और सुमात्रा के मूल निवासी ये पांच युवा ओरंगुटान बालासोर के जंगल तक पहुंचे कैसे?
फाइल फोटो
