आंदोलन से सुधार तक: परीक्षा व्यवस्था बदलने की दिशा में सरकार के बड़े कदम

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नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स सबसे बड़ा फैसला, अब संसद में सख्त कानून पर नजर

नई दिल्ली, 26 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। देशभर में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर हुए छात्र आंदोलन, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की प्रक्रिया तेज कर दी है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। इसे अब तक का सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत कदम माना जा रहा है।

सरकार के अनुसार, यह टास्क फोर्स देश की परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा कर उसे अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, तकनीक-सक्षम और विश्वसनीय बनाने के लिए सुझाव देगी। समिति परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली, डिजिटल सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर भी सिफारिशें तैयार करेगी।

टास्क फोर्स के गठन के साथ ही सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि परीक्षा सुधार केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें कानूनी और संस्थागत आधार भी दिया जाएगा।

संसद में अगला बड़ा कदम

अब नजर सोमवार को संसद में होने वाली कार्यवाही पर है। सरकार पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश कर सकती है। प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा, अधिक जुर्माना और जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने जैसे प्रावधान शामिल किए जाने की संभावना है।

एनटीए में शुरू हुआ व्यापक पुनर्गठन

परीक्षा प्रणाली में सुधार के तहत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। एजेंसी की कार्यप्रणाली, परीक्षा सुरक्षा और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक बदलाव किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 47 संविदा कर्मियों को हटाया गया है और नए पेशेवरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है।

मंत्रालय में भी बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

शिक्षा मंत्रालय में भी शीर्ष स्तर पर बदलाव किए गए हैं। शिक्षा सचिव का तबादला किया गया है। वहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभालते ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर परीक्षा सुधारों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

आंदोलन के बाद अब तक के प्रमुख कदम

  • देशभर में छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर पर व्यापक प्रदर्शन।
  • सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा प्रणाली में सुधार का स्पष्ट रोडमैप मांगा।
  • सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई।
  • सरकार के आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन समाप्त किया।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
  • प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला।
  • शिक्षा सचिव का तबादला किया गया।
  • एनटीए के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।
  • 47 संविदा कर्मियों को हटाकर नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की गई।
  • परीक्षा घोटालों के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा की गई।
  • नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड परीक्षा सुधार टास्क फोर्स गठित की गई।
  • अब संसद में परीक्षा संबंधी कानून को और सख्त बनाने की तैयारी है।

आगे की राह

सरकार के हालिया कदम बताते हैं कि वह केवल पेपर लीक की घटनाओं पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि इन सुधारों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि टास्क फोर्स की सिफारिशें कितनी जल्दी लागू होती हैं और प्रस्तावित कानूनी तथा प्रशासनिक बदलाव जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाते हैं।

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