नई दिल्ली, 2 सितंबर । विश्वविद्यालयों में परीक्षा की जांची हुई उत्तरपुस्तिका देखने के लिए छात्रों से मनमाना शुल्क वसूलने की व्यवस्था पर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत अपनी जांची हुई उत्तरपुस्तिका की कॉपी मांगता है तो विश्वविद्यालय इसके लिए अपनी ओर से कोई अलग या ‘इंटरनल फीस’ निर्धारित नहीं कर सकता।
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने असम यूनिवर्सिटी से संबद्ध पत्थरकांडी कॉलेज के एक छात्र की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। छात्र ने 21 नवंबर 2025 को RTI के तहत दर्शनशास्त्र विषय की अपनी जांची हुई उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी मांगी थी। उसे परीक्षा में 70 में से 35 अंक मिले थे और वह मूल्यांकन की जांच करना चाहता था।
यूनिवर्सिटी ने मांगे थे ₹1,000
RTI आवेदन के जवाब में विश्वविद्यालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने छात्र से ₹1,000 अतिरिक्त शुल्क जमा करने को कहा। विश्वविद्यालय का कहना था कि यह राशि RTI आवेदन को प्रोसेस करने के लिए निर्धारित है।
बाद में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने भी विश्वविद्यालय की मांग को सही ठहराया। उसका तर्क था कि असम यूनिवर्सिटी एक स्वायत्त संस्था है और उसने प्रत्येक उत्तरपुस्तिका के लिए ₹1,000 शुल्क निर्धारित किया है।
छात्र ने इस फैसले को CIC में चुनौती देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण है। इसलिए RTI के तहत सूचना उपलब्ध कराने के लिए RTI नियमों में निर्धारित शुल्क ही लिया जा सकता है। उसके अनुसार नियमों में सूचना उपलब्ध कराने के लिए प्रति पेज ₹2 का शुल्क निर्धारित है, लेकिन किसी विश्वविद्यालय को उत्तरपुस्तिका के लिए मनमाना संस्थागत शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
RTI Act की धारा 22 बनी आधार
अपील पर सुनवाई के दौरान छात्र ने RTI Act की धारा 22 का भी हवाला दिया। यह धारा RTI Act को उन दूसरे कानूनों, नियमों या प्रावधानों पर वरीयता देती है, जो RTI Act के प्रावधानों से असंगत हों।
CIC ने छात्र के तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि RTI के तहत सूचना मांगने वाले व्यक्ति से ऐसी अतिरिक्त फीस नहीं ली जा सकती, जिसका प्रावधान RTI Act और उसके तहत बनाए गए नियमों में नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला
मामले में सुप्रीम कोर्ट के CBSE बनाम आदित्य बंदोपाध्याय और ICSI बनाम पारस जैन मामलों के फैसलों का भी हवाला दिया गया। इन मामलों में जांची हुई उत्तरपुस्तिकाओं तक अभ्यर्थियों की पहुंच और RTI के माध्यम से सूचना प्राप्त करने के अधिकार से जुड़े सवालों पर न्यायालय ने विचार किया था।
CIC ने कहा कि किसी संस्था की अपनी आंतरिक व्यवस्था RTI Act के तहत सूचना उपलब्ध कराने के लिए लागू वैधानिक शुल्क व्यवस्था से अलग नहीं हो सकती।
दो सप्ताह में देनी होगी उत्तरपुस्तिका
आयोग ने असम यूनिवर्सिटी के CPIO का ₹1,000 अतिरिक्त शुल्क लेने का निर्णय खारिज कर दिया। विश्वविद्यालय को निर्देश दिया गया कि छात्र की जांची हुई उत्तरपुस्तिका की कॉपी RTI नियमों के तहत निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क पर उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने इस मामले में उत्तरपुस्तिका की कॉपी दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
देशभर के विश्वविद्यालयों के छात्रों के लिए अहम
CIC का यह फैसला उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें परीक्षा में अपेक्षा से कम अंक मिलने के बाद अपनी उत्तरपुस्तिका देखनी होती है। विश्वविद्यालय यदि अपनी आंतरिक फीस व्यवस्था के आधार पर RTI के तहत मांगी गई उत्तरपुस्तिका के लिए अलग शुल्क लगाते हैं, तो इस फैसले के बाद ऐसी मांग पर सवाल उठ सकता है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि RTI के तहत उत्तरपुस्तिका हर स्थिति में पूरी तरह मुफ्त मिलेगी। आयोग ने स्पष्ट रूप से RTI Act और उसके नियमों के तहत निर्धारित शुल्क के अनुसार कॉपी उपलब्ध कराने की बात कही है। यानी विश्वविद्यालय अपनी मनमानी या अलग से तय की गई ‘इंटरनल फीस’ नहीं लगा सकता।
