पटना, 17 अगस्त। वाय के न्यूज। बिहार में NEET-UG और री-NEET UG 2026 में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) का शिकंजा मेडिकल कॉलेजों से जुड़े छात्रों और डॉक्टरों तक कसता जा रहा है। डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट और डॉ. उज्ज्वल राज की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी करीब आधा दर्जन एमबीबीएस छात्रों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इनमें कुछ पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह कथित तौर पर सॉल्वर बनकर परीक्षा देने का संदेह है।
ईओयू ने हाल में डॉ. रविशंकर, डॉ. उज्ज्वल राज और रविशंकर के भाई अश्विनी कुमार को गिरफ्तार किया था। रविशंकर और उज्ज्वल राज पावापुरी स्थित मेडिकल कॉलेज के अंतिम वर्ष के एमबीबीएस छात्र बताए गए हैं। दोनों को पटना में आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के परीक्षा केंद्र के बाहर से पकड़ा गया था।
जांच में सामने आया है कि कथित गिरोह अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाने के लिए मेडिकल छात्रों को सॉल्वर के रूप में इस्तेमाल करता था। इसके लिए बायोमेट्रिक जानकारी में कथित हेरफेर, फोटो बदलने और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिए जाने की बात सामने आई है। ईओयू के अनुसार, इस तरह की व्यवस्था के लिए अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12 से 30 लाख रुपये तक लिए जाते थे।
ईओयू अब उन मेडिकल छात्रों की पहचान और भूमिका की जांच कर रही है, जिनके बारे में पूछताछ के दौरान सुराग मिले हैं। जांच का दायरा केवल एमबीबीएस छात्रों तक सीमित नहीं है। नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों से जुड़े कुछ छात्रों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की रिपोर्ट है।
बायोमेट्रिक और फर्जी दस्तावेज भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसी कथित सॉल्वर नेटवर्क में बायोमेट्रिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है। लखीसराय, हाजीपुर, नवादा और नालंदा समेत कुछ जिलों में बायोमेट्रिक से जुड़े विक्रेताओं और अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
ईओयू को तलाशी के दौरान अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े प्रवेश पत्र, अंकपत्र, प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज मिलने की भी जानकारी सामने आई है। इन दस्तावेजों के आधार पर संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।
चार मामले दर्ज, जांच का दायरा बढ़ा
बिहार में NEET-UG 2026 की 3 मई की परीक्षा और 21 जून की री-NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चार मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें एक मामला नालंदा के गिरियक थाने में 3 मई की परीक्षा से संबंधित है, जबकि तीन मामले 21 जून की री-NEET परीक्षा को लेकर लखीसराय में दर्ज हुए हैं।
ईओयू की जांच में कथित नेटवर्क के जरिए केवल NEET ही नहीं, बल्कि दूसरी परीक्षाओं में भी सॉल्वर बैठाने और दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका सामने आई है। अब एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त दस्तावेजों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर रही है।
हालांकि, जिन मेडिकल छात्रों या डॉक्टरों की भूमिका अभी जांच के दायरे में है, उनके खिलाफ आरोपों को गिरफ्तारी या दोष सिद्ध होने तक अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। ईओयू की जांच पूरी होने के बाद ही उनकी वास्तविक भूमिका स्पष्ट होगी।
