नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर सामने आया है। भारत ने हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय के उस फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें संधि को स्थगित करने के भारत के फैसले को उचित नहीं माना गया था। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस मध्यस्थता पैनल के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता और उसके निर्णय से बाध्य नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि भारत ने मध्यस्थता पैनल को कभी मान्यता नहीं दी है। भारत न तो इसकी कार्यवाही में शामिल हुआ और न ही उसके फैसलों को स्वीकार करता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत की स्थिति पहले से स्पष्ट रही है और पैनल का निर्णय भारत के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।
पैनल के गठन पर ही भारत को आपत्ति
भारत ने मध्यस्थता पैनल के गठन पर भी सवाल उठाया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पैनल की स्थापना सिंधु जल संधि में निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप नहीं हुई। इसी आधार पर भारत का कहना है कि ऐसे पैनल को संधि के तहत भारत के संप्रभु फैसलों पर निर्णय देने का अधिकार नहीं है।
भारत ने विशेष रूप से जल संसाधनों और उनसे जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन मामलों में उसके संप्रभु निर्णयों पर मध्यस्थता पैनल का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
संधि अभी भी स्थगित
विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि सिंधु जल संधि अभी भी स्थगित है। भारत का कहना है कि संधि को स्थगित करने का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारणों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और मध्यस्थता पैनल का फैसला इस स्थिति को नहीं बदलता।
हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि भारत द्वारा संधि स्थगित करने के लिए बताए गए कारण उसके निलंबन या समाप्ति को उचित नहीं ठहराते। पैनल ने भारत से 1960 की सिंधु जल संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन जारी रखने का आह्वान किया था।
पहलगाम हमले के बाद लिया गया था फैसला
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। भारत ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद को प्रमुख कारण बताया था।
भारत का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े ऐसे फैसलों पर किसी बाहरी मध्यस्थता तंत्र का अधिकार नहीं हो सकता। भारत ने संकेत दिया है कि मध्यस्थता पैनल का फैसला उसके जल संसाधनों या उनसे संबंधित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर भविष्य के निर्णयों को प्रभावित नहीं करेगा।
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल के इस्तेमाल और बंटवारे के लिए व्यवस्था तय की गई थी।
