राष्ट्रीय प्रसारण दिवस: बदलती तकनीक, अटल भरोसा

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

रायपुर, 23 2026 (वाय के न्यूज)। भारत में हर वर्ष 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1927 में मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) से इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी द्वारा देश के पहले आधिकारिक रेडियो प्रसारण की शुरुआत की याद में मनाया जाता है। इसी ऐतिहासिक पहल ने भारत में सार्वजनिक प्रसारण की मजबूत नींव रखी, जो आगे चलकर आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे विश्वसनीय संस्थानों के रूप में विकसित हुई।

रेडियो से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक का सफर

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत 1923 में रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे के प्रयोगात्मक प्रसारण से हुई। इसके बाद 23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी ने नियमित प्रसारण शुरू किया। वर्ष 1930 में सरकार ने प्रसारण सेवा का संचालन अपने हाथ में लिया और 8 जून 1936 को इसका नाम ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio) रखा गया। स्वतंत्रता के बाद 1956-57 में इसे आधिकारिक रूप से आकाशवाणी नाम मिला और 1957 में लोकप्रिय विविध भारती सेवा की शुरुआत हुई, जिसने रेडियो को हर घर का साथी बना दिया।

आज भी कायम है भरोसा

तकनीक के इस दौर में जहां सूचना के अनेक माध्यम मौजूद हैं, वहीं समाचारों की विश्वसनीयता के मामले में आज भी बड़ी संख्या में लोग दूरदर्शन और आकाशवाणी पर भरोसा करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां प्रसारित समाचार प्रमाणित, संतुलित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होते हैं।

पहले लोग ट्रांजिस्टर और रेडियो सेट पर समाचार सुनते थे, लेकिन अब समय बदल गया है। आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों मोबाइल फोन, वेबसाइट, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध हैं। इससे दूरदराज के गांवों, सीमावर्ती क्षेत्रों और इंटरनेट की सीमित सुविधा वाले इलाकों तक भी विश्वसनीय समाचार और जनोपयोगी कार्यक्रम आसानी से पहुंच रहे हैं।

सूचना, शिक्षा और जनसेवा का माध्यम

आकाशवाणी का ध्येय वाक्य “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली का आधार है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर देश के विकास, प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, चुनाव और राष्ट्रीय संकट के समय तक आकाशवाणी ने लोगों तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

समाचारों के साथ-साथ कृषि सलाह, मौसम पूर्वानुमान, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा, रोजगार, संस्कृति, लोकसंगीत, युवाओं और महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों ने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। यही कारण है कि आकाशवाणी को दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक प्रसारण नेटवर्कों में गिना जाता है।

बदलते दौर में भी प्रासंगिक

एफएम रेडियो, डिजिटल स्ट्रीमिंग, पॉडकास्ट और मोबाइल एप्लिकेशन के दौर में भी सार्वजनिक प्रसारण की उपयोगिता कम नहीं हुई है। प्रसार भारती लगातार नई तकनीकों को अपनाकर अपने श्रोताओं और दर्शकों तक पहुंच बढ़ा रही है। आज आकाशवाणी और दूरदर्शन केवल रेडियो और टेलीविजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्मार्टफोन पर भी 24 घंटे उपलब्ध हैं।

राष्ट्रीय प्रसारण दिवस का संदेश

राष्ट्रीय प्रसारण दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि उस भरोसे, निष्पक्षता और जनसेवा की परंपरा का सम्मान है जिसने लगभग एक सदी से भारत को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन से जोड़े रखा है। बदलती तकनीक के बावजूद दूरदर्शन और आकाशवाणी आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए विश्वसनीय समाचार और जनहित की जानकारी का भरोसेमंद स्रोत बने हुए हैं।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर