श्रीहरिकोटा। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने शनिवार को इतिहास रच दिया। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले ऑर्बिटल प्रक्षेपण यान विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण कर उसे निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित किया। इसके साथ ही भारत निजी क्षेत्र द्वारा विकसित ऑर्बिटल रॉकेट के सफल प्रक्षेपण वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया।
‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। निर्धारित समय से लगभग 35 मिनट की देरी के बाद उड़ान भरे रॉकेट ने अपने सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए और कुल छह पेलोड को निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित किया। इनमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड के साथ दो उपग्रह भी शामिल हैं।
विक्रम-1, स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इससे पहले नवंबर 2022 में कंपनी ने विक्रम-एस का सफल सब-ऑर्बिटल प्रक्षेपण कर भारत की पहली निजी रॉकेट उड़ान का इतिहास बनाया था। विक्रम-1 की सफलता के साथ कंपनी ने अब उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की क्षमता भी प्रदर्शित कर दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए इसे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए “ऐतिहासिक नया अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों से नवाचार, उद्यमिता और युवा प्रतिभाओं को नई ऊर्जा मिली है तथा भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से छोटे उपग्रहों के वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता मजबूत होगी। साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), इन-स्पेस (IN-SPACe) और निजी उद्योग के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी तथा देश के स्पेस-टेक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।
