नई दिल्ली, 05 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। केंद्र सरकार ने कहा है कि उसका उद्देश्य भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी, अश्लील और भ्रामक सामग्री से मुक्त रखते हुए सभी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है। सरकार ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों को और सख्त किया है।
सरकार के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य डिजिटल मध्यस्थों के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि उनके प्लेटफॉर्म पर अश्लील, बाल यौन शोषण से जुड़ी, महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक, निजता का उल्लंघन करने वाली या किसी कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री का प्रसार न हो। नियमों का पालन नहीं करने पर प्लेटफॉर्म कानूनी संरक्षण खो सकते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को आईटी नियमों में संशोधन कर डीपफेक और एआई से तैयार भ्रामक सामग्री को लेकर भी सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं। अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऐसी अवैध सामग्री की पहचान कर उसके प्रसार को रोकने के लिए तकनीकी उपाय करने होंगे। जरूरत पड़ने पर संबंधित मामलों की सूचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी देनी होगी।
साइबर अपराधों की शिकायत के लिए गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों की गुमनाम शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा पोर्टल पर “रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट” मॉड्यूल भी शुरू किया गया है, जिसके जरिए नागरिक संदिग्ध वेबसाइट, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया लिंक, ईमेल आईडी और डीपफेक सामग्री की रिपोर्ट कर सकते हैं।
सरकार ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 132.93 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं और अब तक 24,600 से अधिक पुलिसकर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जांच का प्रशिक्षण दिया गया है।
सरकार के अनुसार, साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए दो लाख से अधिक एनसीसी, एनएसएस और एनवाईकेएस स्वयंसेवकों को भी प्रशिक्षण दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
