सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस ओका ने कहा
एनसीआरबीसी-2026 का चौथा संस्करण पूरा हुआ

नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय एस. ओका ने कहा है कि प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग है।
जस्टिस ओका भारत सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (एसबीई) की ओर से आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट (एनसीआरबीसी) 2026 के चौथे संस्करण में वे मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। इस आयोजन का हाल ही में नई दिल्ली में समापन हुआ।
न्यायमूर्ति ओका ने इस विषय पर बल दिया कि विकसित भारत का अर्थ भारत की संवैधानिक दृष्टि, विशेष रूप से मौलिक अधिकारों, राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों और मौलिक कर्तव्यों के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास तभी सही मायने में बदलाव लाने वाला हो सकता है, जब वह मानवीय गरिमा की रक्षा करे, सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन दे और वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करे। न्यायमूर्ति ओका ने इस न्यायशास्त्र के विकास को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधिनियमन से जोड़ा, जिसे देश के इतिहास की सबसे विनाशकारी औद्योगिक आपदाओं में से एक, भोपाल गैस त्रासदी के बाद लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी ने भारत के पर्यावरण न्यायशास्त्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ का काम किया, जिसने राज्य को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक व्यापक कानूनी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए बाध्य किया।
न्यायमूर्ति ओका ने टिप्पणी की कि किसी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति को केवल आर्थिक संकेतकों से नहीं मापा जा सकता, और पर्यावरणीय कल्याण को राष्ट्रीय विकास के एक समान तौर पर महत्वपूर्ण सूचक के रूप में माना जाना चाहिए। उन्होंने निगमों, नियामकों और नागरिक समाज से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समानता और न्याय के प्रति संवैधानिक और कानूनी दायित्व को आत्मसात करने, न कि इसे विवेकाधीन या गौण चिंता का विषय मानने, का आह्वान किया।
समापन भाषण देते हुए, भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान के महानिदेशक व सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन संबंधी विचार केवल अनुपालन की औपचारिकता से आगे बढ़कर व्यावसायिक तन्यकशीलता, प्रभावी जोखिम प्रबंधन, निवेश आकर्षण और संपोषित नवाचार का आधार बन गए हैं। जिम्मेदारी भरा व्यवसाय अंततः केवल नियमों से नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों और साहसी नेतृत्व से संचालित होता है।

